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छत्तीसगढ़ की इस गुफा में स्थित थे प्रभु श्री राम, कोरबा का इतिहास, चित्र पर आज भी जारी है शोध


अनूप/कोरबाः छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल कहा जाता है। भगवान राम से जुड़े अनेकों प्राचीन स्थल और पुरातन यहां प्रचलित हैं। जब वनवास काल के दौरान जंगल में रहवास कर रहे थे, तब दंडकारणय के जंगल में काफी लंबा समय था। वर्तमान में कोरबा जिले का भी यही जंगल क्षेत्र है, इसलिए कोरबा जिले में भी अनेक स्थल ऐसे हैं। जहां प्रमाण मिलता है कि भगवान श्री राम वनवास काल के दौरान यहां आये थे।

भगवान राम का ननिहाल छत्तीसगढ़ में एक ऐसी गुफा है। जहां माता अनुसुइया ने माता-सीता को नारी धर्म की शिक्षा दी थी। वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ यहां विश्वामित्र के आश्रम में कुछ धार्मिक अनुष्ठान थे। इसी वजह से शहर के इस क्षेत्र को सीतागढ़ी के नाम से जाना जाता है। सीतागढ़ी छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में है। आज भी आते हैं दूर-दूर से इस पवित्र गुफा में बने ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन।

गुफा के बाहरी भित्ती पर दो लाइन का प्लास्टर
सीतागढ़ी गुफा में राम, लक्ष्मण और ऋषि विश्वामित्र की सातवीं शताब्दी में बनी प्राचीन मूर्तियाँ हैं। बीच में ऋषि की बड़ी मूर्ति और वामपंथ में राम और लक्ष्मण के दर्शन आ रहे हैं। यहां एक पद चिह्न भी मौजूद है, जिसे माता सीता का बताया जाता है। गुफा के बाहरी भित्ती पर दो लाइन का प्लास्टर है। नागपुर की पुरातत्व सर्वेक्षण संस्था की टीम अभी इस पर शोध कर रही है। अब तक इस लेख को पढ़ना संभव नहीं है।

प्राचीन वास्तुकला में लिखी है पुरानी बातें
कोरबा जिला पुरातत्व विभाग के मार्गदर्शक हरिसिंह क्षत्रिय का दावा है कि इस प्राचीन शिलालेख में अष्टद्वार जिले के निवासी वेदपुत्र श्रीवर्धन का उल्लेख है। इस लेख की लंबाई 163 है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राम वनगमन पथ को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। राम वन गमन पथ पर विभिन्न शोधों के अनुसार श्रीराम, छत्तीसगढ़ वन गमन के दौरान लगभग 75 स्थानों की यात्रा की गई।

टैग: अयोध्या समाचार, छत्तीसगढ़ समाचार, कोरबा खबर, स्थानीय18, भगवान राम



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