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किडनी स्टोन के लिए काल है यह पौधा, बड़े से बड़े स्टोन को भी दे सकता है गायब!


आशीष कुमार, पश्चिमी चंपारण। बुढ़ापे में होने वाले रोग अब युवा वर्ग में ही लोग अपना शिकार बनाना चाहते हैं। इनमें ब्लड क्लॉथ, शुगर और किडनी में पथरी होने की समस्या सबसे ज्यादा है। खास कर अगर बात की जाए किडनी में पथरी की, तो इस बीमारी में लंबे समय तक अंग्रेजी इलाज की जरूरत पड़ जाती है। इसका बुरा असर उनके शरीर पर स्पष्ट रूप से दिखता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि किस प्रकार की चिकित्सा के बारे में आयुर्वेद में बताया गया है।

पथरी का काल है पाषाणभेद पौधा
किडनी के आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पैजेस कहते हैं कि किडनी स्टोन का बेहतर इलाज सिर्फ आयुर्वेद में ही संभव है। बड़े-बड़े यूरोलोजिस्ट भी इस बीमारी में आयुर्वेदिक औषधियों से इलाज करते हैं। सामान्य रूप से 10 तक के स्टोन का इलाज आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से किया जा सकता है। वे शिष्य हैं किपाषाणभेद का पौधा भारत में बहुत प्रसिद्ध है।

इसे स्टोनचट्टा, स्टोनचट्टा, स्टोनचूरा आदि नाम से भी जाना जाता है। पाषाणभेद शब्द का अर्थ होता है पत्थर को तोड़ना। यही इस दवा का मुख्य गुण भी है. इसका उपयोग पथरी के इलाज में किया जाता है। ऐसे ही औषधीय गुण होते हैं, जो पथरी को छोटे-छोटे बच्चों में पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देते हैं।

ऐसे करें सेवन
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, पाषाणभेद की खुराक से आप मोटे केश या काढ़ा बना सकते हैं। इसके बाद इसे 40-50 मिमी की खुराक दिन में दो या तीन बार ली जा सकती है। इससे पेशाब में पथरी होने से उसका आकार कम हो जाता है और बार-बार पेशाब आने से भी राहत मिलती है। काढ़ा बनाने के लिए 1 बड़ा पाउडर पाउडर 2 कप पानी में मिला लें और इसे अच्छी तरह से मिलाएं। जब 1 कप पानी रह जाए तो इसे अच्छा लें और दिन में दो या तीन बार इसे पिएं।

अगर आपको कोई गंभीर समस्या है और आपकी किडनी में पथरी की स्थिति अलग-अलग है, तो खुद से दवा न लें। हमेशा डॉक्टर से सलाह लेकर दवा का सेवन करें।

इन बातों का ध्यान
आयुर्वेद में किडनी रोग के इलाज के लिए पाषाणभेद के दोस्त, वरुण क्वाथ, गोक्षुरा गुग्गुल, पुनर्नवा क्वाथ आदि आहार बेहद खतरनाक हैं। इसके साथ ही कुलथी या कुरथी की दाल का भी सेवन किया जाता है. आयुर्वेदाचार्यों को इस रोग में टमाटर, चुकंदर, अमरूद या पालक को कम मात्रा में खाना चाहिए। साथ में ही रेड मीट (बेकरे और अन्य बड़े मसालों का मास) नहीं या बहुत कम खाना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 9-10 गिलास पानी अवश्य पिएं और बीज वाली चाय का सेवन कम मात्रा में करें।

इस खबर में दी गई औषधि/औषधि और स्वास्थ्य बेनिटिट रेसिपी की सलाह, हमारे सिद्धांतों से जुड़ी चर्चा के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, कोई व्यक्तिगत सलाह नहीं। हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए डॉक्टरों से सलाह के बाद ही, किसी भी चीज का उपयोग करें। कृपया ध्यान दें, लोकल-18 की टीम का किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।

टैग: स्वास्थ्य समाचार, जीवन शैली, स्थानीय18



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