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चिप के लिए सिलिकॉन पर आधारित ‘खतम’, सिलिकॉन ने इस धातु से निर्मित फैंटेसी सेमीकंडक्टर बनाया


ग्रेफीन चिप, सेमीकंडक्टर- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: जॉर्जिया टेक रिसर्च
इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रयुक्त होने वाले सिलिकॉन चिप का विकल्प निकाला गया है।

टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, स्मार्टवॉच सहित इलेक्ट्रॉनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में प्रयुक्त होने वाले चिप सिलिकॉन से बने होते हैं, जिसके कारण इक्विपमेंट निर्मित सिलिकॉन सिलिकॉन पर पूरी तरह से अलग-अलग तरह से बने रहते हैं। कोविड के बीच सिलिकॉन की ताकतवर चेन में आई दिक्कतों की वजह से कई कंपनियों ने अपने नए उत्पादों के बाजार में बिक्री के लिए भारी इंतजार करना शुरू कर दिया था। जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के ग्रेजुएट ने ग्राफ़ीन मेटल से पहला फ़ंशियल समेकंडक्टर बनाया है। इस सेमीकंडक्टर में कार्बन एटम का सिंगल शेयर लगा है, जो बेहद मजबूत बंधन बनाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक जर्नल में यह इलेक्ट्रोसिटी को अलग-अलग स्थिति में प्रवाहित कर सकता है। इस सेमीकंडक्टर के बन जाने से इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में एक नई क्रांति आएगी और सिलिकॉन पर सिलिकॉन कम होगा। जॉर्जिया इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर वाल्टर डे हीर के अगेंस्ट में यह ग्राफीन सेमीकंडक्टर बनाया गया है। इसे बनाने वाले रिसर्चर्स अटलांटा, जॉर्जिया और तियानजिन, चीन के हैं। यह सेमीकंडक्टर कन्वेन्शनल माइक्रो इलेक्ट्रॉन्स मार्केट मेथड के साथ संगत है।

ग्राफीन में है खास गुण

प्रोफ़ेसर वाल्टर डे हीर ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से ग्राफिक्स की टीम का सर्वेक्षण कर रहे थे। हममें से कई लोगों को ऐसा लगता है कि ग्रेफिन इलेक्ट्रॉनिक्स कभी काम नहीं करेगा, क्योंकि इसमें बैंड गैप है। यह ऐसा गुण है, जो सेमीकंडक्टर को स्विच ऑन और ऑफ करने में मदद करता है। ग्राफीन में अब तक कोई बैंड गैप नहीं मिला है।

हमारे पास एक ऐसा रोबस्ट ग्राफीन सेमीकंडक्टर है, जो सिलिकॉन की मोबिलिटी से 10 गुना बेहतर है। यह एक यूनीक गुण है, जो सिलिकॉन में नहीं पाया जाता है। हमारे इस 10 साल के परिश्रम का निष्कर्ष यह है कि क्या यह मैटेरियल इतना अच्छा साबित होगा कि किसी भी डिजिटल तरीके से सही तरीके से काम किया जाए?

काम कैसे होता है?

ग्राफिक्स फॉर्म में न तो एक सेमीकंडक्टर है और न ही कोई धातु है, बल्कि एक सेमीकंडक्टर है। किसी भी मैटीरियल पर जब इलेक्ट्रिक फील्ड अप्लाई की जाती है तो एक बैंड गैप बनता है, जिससे वह स्विच ऑन और स्विच ऑफ होता है। ग्राफीन इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने के लिए यह एक बड़ा सवाल था कि इसे कैसे स्विच ऑन और ऑफ किया जाए ताकि यह सिलिकॉन की तरह काम कर सके। इसके लिए इसमें डोपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से ग्राफीन अपना डोमेन डोनेट कर सकता है और चिप सही तरीके से काम करता है।

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