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झाड़-फूंक के चक्कर में बढ़ती रही ये खतरनाक मानसिक बीमारी, जानिए इसके लक्षण और बचाव का उपाय


कमल पिमोली/गर्लवाल।मानसिक रोग को लेकर आज भी समाज में अनेक भ्रान्तियाँ हैं। कुछ लोग इसे दैवीय प्रकोप, भूत-प्रेत, जादू-टोना का प्रभाव मानते हैं। अक्सर ऐसी स्थिति से उपकरण वाले तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ जाते हैं। टोना टोटका से लेकर कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं, लेकिन हालात ठीक होने के साथ ही समारोह आयोजित किए जाते हैं। हम बात कर रहे हैं सीजोफ्रेनिया की. सीजोफ्रेनिया एक मानसिक रोग है, लेकिन लोग अक्सर इसका इलाज ढूंढते हैं, इसके बजाय इसे भूत-प्रेत, आत्मा और जादू टोने का प्रभाव समझकर झाड़-फूंक के चक्कर में डाल दिया जाता है। इलाज नहीं निर्माण. इससे यह बीमारी और बढ़ती है

सीजोफ्रेनिया एक ऐसा मानसिक रोग है जिसमें मरीज़ों को अपने व्यक्तित्व के बारे में कुछ पता नहीं रहता है। उसके जीवन में न तो खुशी रहती है और न ही गम। उसे अपनी साजिश के खिलाफ़ खतरे का डर लगा रहता है। जिस व्यक्ति में भी ये लक्षण होते हैं उसे तुरंत डॉक्टर से मश्विरा लेना चाहिए।

ये हैं सीजोफ्रेनिया के शुरुआती लक्षण
अस्पताल के मनोरोग विभाग के डॉक्टर मरीज़ हैं कि आप में खोए रहना, अपनी बातें करना, चेहरे पर भाव न रखना, सारा दिन लेटे रहना, बहुत कोशिश करना पर उग्र हो जाना, बातें हंसना और लोग जानना जब मैं उसके खिलाफ बात कर रहा होता हूं तो रोगी को लगता है कि उसका मजाक बनाया जा रहा है, उसकी साजिश रची जा रही है आदि सीजोफ्रेनिया के लक्षण हैं। इस दौरान किसी तरह की आवाज आना, इसके लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही शक और खून का होना भी स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षण हैं। यह एक तरह की मानसिक बीमारी है.

बायोलॉजिकल डिसऑर्डर यह बीमारी है
डॉ. वैज्ञानिक बताते हैं कि लोग बार-बार कहते हैं कि यह बीमारी तनाव का कारण है, हालांकि ऐसा नहीं है। यह एक जैविक जैविक विकार है। डॉ. मोहित के अनुसार परिवार जीन व न्यूरो केमिकल के काम करने के तरीके पर इस बीमारी को प्रतिबंधित किया गया है। 20 से 40 वर्ष की उम्र तक बीमारी का पहला चरण हो सकता है। शुरुआत में रोगी उल्टी-सीधी बातें करते हैं। नींद न आना और चिड़चिड़ापन भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

समय से इलाज नहीं मिला तो…
डॉक्टर लेखक कहते हैं कि अगर समय पर इलाज मिल जाए तो यह बीमारी निकल सकती है लेकिन अगर समय पर इलाज नहीं मिला तो बीमारी अल्ट्रा स्टेज में पहुंच जाती है। इस स्टेज में एज़िमेट को भ्रम या फंतासी कलाकृतियाँ दिखाई देती हैं। शुरुआत में दवा और थेरेपी से लेकर मरीज़ सामान्य हो सकते हैं। डॉ. ऑनलाइन चार्टर में कहा गया है कि इधर-उधर भटकने से बेहतर है कि सही समय पर डॉक्टर के पास पहुंच कर इलाज कराएं ताकि उन्हें समय पर ठीक किया जा सके।

सीजोफ्रेनिया के दौरान ये सावधानियां
⦁ रोगी को कभी भी अकेला और खाली न छोड़ें.
⦁ मेहमान से खुल कर बात करें और उसके विचार-विमर्श की कोशिश करें
⦁ रोगी को खाली बैठने की जगह न दें, काम में लगे रहने की जगह और नए श्रमिकों के लिए नामांकन करें।
⦁ मरीज़ में ही भावना न आये. अगर आप बैठे हैं तो घर जाकर मरीज से बात करें.
⦁ तनाव दूर करने के लिए योग का सहारा लें

अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि और स्वास्थ्य बेनिटिट रेसिपी की सलाह, हमारे सुझावों की चर्चा के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है न कि व्यक्तिगत सलाह। हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए डॉक्टरों से सलाह के बाद ही किसी चीज का उपयोग करें। कृपया ध्यान दें, लोकल 18 की टीम का किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।

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