अरशद खान/द.देश की सबसे प्राचीनतम पद्धति आयुर्वेद में लगभग हर बीमारी का इलाज छिपा है। बात अगर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की कर ली जाए, तो इसका इलाज आयुर्वेद के पंचकर्मा से भी संभव है। आयुर्वेद में डॉक्टर अस्थि थायरेपी, कपिंग थायरेपी और पोटली थायरेपी द्वारा सर्वाइकल की समस्या को दूर किया जा सकता है। यदि आप भी सर्वाइकल की समस्या से जूझ रहे हैं, तो हमारी इस खबर में जानें कि कौन-कौन सी आयुर्वेदिक विधियां हैं, राइन सर्वाइकल की समस्या को दूर किया जा सकता है।
स्थानीय 18 से बातचीत में उत्तराखंड के राजधानी निवासी आयुर्वेदिक डॉक्टर प्रेरणा गुसाईं ने कहा कि सर्वाइकल की समस्या आम हो गई है। आयुर्वेद में शामिल जड़ी-बूटी और थायरेपी का मिश्रण है, जिससे इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद में पंचकर्म द्वारा सर्वाइकल का इलाज किया जाता है। इसमें एस्ट्रोजेन अस्थि, कपिंग थायरेपी और प्लांट पोटली थायरेपी से इलाज किया जाता है।
एस्ट्रोलॉजी अस्थि थाईरेपी
डॉक्टर प्रेरणा ने कहा कि मरीज के शरीर पर स्टेरॉयड अस्थि थायरेपी में दांतों से वॉल ऑयल डाला जाता है। यह वॉल डॉक्टर द्वारा चयनित क्षेत्र पर बनाया गया है। ऐसा करने पर मरीज को खाल का तेल सोखने से दर्द से राहत मिलती है। इस थायरेपी में इस्तेमाल किये जाने वाले तेल आयुर्वेदिक होते हैं, जो स्वास्थ्य लाभ में बेहद गुणकारी होते हैं।
कपिंग थायरेपी
उन्होंने कहा कि सरवाइकल में कपिंग थायरेपी बहुत बड़ा रोबोट है। डॉक्टरी कपिंग, ब्लड कपिंग थायरेपी सर्वाइकल में बेहद शानदार है। इस मरीज को दर्द से अंतःक्रिया होती है। इसमें लेप के माध्यम से प्याज़ के सेवन से भी इलाज किया जाता है।
पोटली थायरेपी
डॉक्टर प्रेरणा ने आगे कहा कि आयुर्वेद में पोटली थायरेपी कई तरह की होती है, जिसमें से एक औषधि पोटली होती है और दूसरा पत्र पोटली ज्यादातर इस्तेमाल की जाती है। औषधि पोटली में कई सारी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है और पत्र पोटली में औषधीय गुण वाले औषधि जैसे- अरंडी, निर्गुंडी, धतूरा आदि का उपयोग किया जाता है। ऐसा करने से मरीजों की मसल्स रिलीज होती हैं, जिससे दर्द में राहत मिलती है।
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि और स्वास्थ्य बेनिटिट रेसिपी की सलाह, हमारे सुझावों की चर्चा के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, कोई व्यक्तिगत सलाह नहीं। हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए डॉक्टरों से सलाह के बाद ही, किसी भी चीज का उपयोग करें। कृपया ध्यान दें, लोकल-18 की टीम का किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।
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पहले प्रकाशित : 7 जनवरी, 2024, 12:40 IST
