रामकुमार नायक/रायपुरः धनुर्विद्या अर्थात तीरंदाजी पुरानी विधाओं में एक मणि है, आज के समय में इसका स्वरूप बदल दिया गया है। अब इस गेम के माध्यम से यूनिवर्सिट के तीरंदाज़ अपने शिष्यों का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे ही एक बिहार का नन्हा तीरंदाज़ अपना भूखा स्टॉकस्टॉक लेकर आया है। असली, छत्तीसगढ़ की राजधानी में इन दिनों 40वीं सब जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। लगभग देश के कोने-कोने से तीरंदाज क्षेत्र में स्थित हैं। बिहार के प्रतिनिधि कर रहे आर्यन कुमार केवल 11 साल के हैं।
आर्यन कुमार ने बताया कि वे बिहार में कैसे रहते हैं, बताया कि वह 6वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं। आर्यन के परिवार में पापा-मम्मी, अंकल-आंटी और दादा-दादी हैं। सब जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता में भाग लेने छत्तीसगढ़ की राजधानी आये हैं। आर्यन ने आगे बताया कि पिछले एक साल से तिरंदाजी खेल रहे हैं और अब तक खेलो इंडिया, मिनी नेशनल विक्ट्री वेवे, एसजीएफआई नाडियाड गुजरात में अपना जौहरी शो का दावा कर चुके हैं। बिहार से एक बार फिर चयन में 40वीं राष्ट्रीय तीरंदाज़ी प्रतियोगिता में शामिल हुए हैं।
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गोल्ड मेडल हासिल करने का सपना
आर्यन ने बताया कि तिरंदाजी के बारे में एक किताब और इस विधान सभा की थानी में पढ़ें। नजर, आज राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाजी प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्हें अभ्यास के लिए नींद सर ने बहुत सहयोग दिया। इसके अलावा आर्यन के माता पिता सहित पूरे परिवार में हमेशा नामांकन दाखिल होते हैं। आर्यन का सपना है कि ओलंपिक में खेलें और देश में गोल्ड मेडल हासिल करें।
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पहले प्रकाशित : 8 जनवरी, 2024, 20:02 IST
