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छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा को लेकर नई पहल करते हुए इस संस्थान ने बड़ा कदम उठाया है, शहर में जागरूकता फैलाई जा रही है


रामकुमार नायक, रायपुर- आज के समय में सड़क सुरक्षा को लेकर हर व्यक्ति का सुझाव अत्यंत आवश्यक है। वास्तविक सरकारी महाविद्यालयों की जानकारी का अभाव बड़े पैमाने पर दुर्घटना का कारण बन सकता है। सूचना लोगों को इसकी बड़ी रिकॉर्डिंग करीने वाली चीज़ है। कई बार सड़क दुर्घटना में लोगों की मौत भी हो जाती है. ऐसे में लोगों के लिए प्रति विशेषज्ञ का होना बेहद जरूरी है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सुरक्षित भाव फाउंडेशन की ओर से चंबा सिग्नल चौक पर सीमेंट रेडियो का संचालन होता है। इस क्लिप रेडियो के माध्यम से लोगों को संदेश के लिए सुझाव देने का काम किया जा रहा है।

सुरक्षित भवः फाउंडेशन के गार्ड डॉ. संदीप धुप्पड़ ने बताया कि उनके संस्थान के लिए रसायन शास्त्र पिछले 10 वर्षों से काम कर रहा है। विश्व का एक प्रयोगशाला रेडियो सेफ भवः फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के दस शहरों में स्थित है। प्रतिदिन सुबह वंदे मातरम की धुन से बांसुरी रेडियो चालू होते हैं। इसमें छोटे-छोटे संदेश दिए गए हैं। नो ड्रिंक एंड ड्राइव, थ्री राइडर, हिट एंड रन जैसे जागरूकता के संदेश शामिल रहते हैं। चिंघाड़ सिग्नल वाले चौक पर वेटिंग टाइम के समय यह चिंघाड़ रेडियो के माध्यम से दिया जाता है। इस तरह का काम पिछले 10 साल पहले इस संस्थान द्वारा किया जा रहा है। संस्थान ने अपने इस जागरूकता अभियान के लिए कई पुरस्कार और विश्व रिकॉर्ड भी प्राप्त किए हैं।

कई शहरों में जागरूकता
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से कोलोराडो रेडियो की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी, फिर दुर्ग, भिलाई, कोंडागांव, राजनंदगांव, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर जैसे कई शहरों में कोलोराडो रेडियो संचालित होता है। आने वाले दिनों में इसका विस्तार तेजी से होने वाला है। छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र के भंडारा, अमरावती जैसे शहरों में मराठी भाषा में भी चॉकलेट रेडियो प्रसारित किया जाता है। अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग तरह के रेडियो जिंगल्स का उपयोग किया जाता है, जिनमें गुजराती, मराठी, पंजाबी के रेडियो जिंगल्स शामिल हैं। प्रतिदिन रात्रि में इसका समापन जय हिंद की धुन से होता है। सीमा पर एक फौजी की तरह ही सुरक्षित भवः फाउंडेशन नेशन के नाम पर जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं। जिस तरह एक फौजदारी सीमा पर हमारी सुरक्षा का काम करता है, उसी तरह यह फाउंडेशन शहर के अंदर लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें सलाहकार बनाने का काम करता है।

शुरुआत में चुनौती बनी रही
डॉ. धुप्पड़ ने आगे बताया कि शुरुआती दिनों में काफी चुनौतीपूर्ण का सामना करना पड़ा। शुरुआत में सुरक्षित भवः फाउंडेशन को मिशन ही नहीं मिल पा रही थी। फाउंडेशन का उद्देश्य भी लोग समझ नहीं पा रहे थे। सेफ भाव फाउंडेशन का प्रोजेक्ट था ‘न्यू इंडिया नो डेथ इन रोड’ अर्थात विकी पर जो दुर्घटनाएं होती हैं, उनमें किसी की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। दुर्घटना में हुई गोलीबारी को रोक के उद्देश्य से इसकी शुरुआत हुई थी। हम चाहते हैं कि सड़क पर कोई घायल हो जाए, तो समय पर इलाज मिल जाए।

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