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चुनाव से पहले फिर होगा ‘बालाकोट’ जैसा हमला? पाकिस्तान को सता रहा यह डर, काकर ने दी गीदड़भकी


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: फ़ाइल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर

पाकिस्तान कीखबरें: साल 2019 में भारत ने बालाकोट में हवाई हमले किये थे। जिसमें भारत की ओर से कुछ आतंकवादी शिविरों को समर्थन देने का दावा किया गया था। इस दौरान भारत और फ्री जेट हवा में एक-दूसरे से भिड़े थे। जिससे दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। पाकिस्तान ने युनाइटेड कमांडर एग्रीमेंट वर्धमान को भी संविधान में ले लिया था। हालाँकि बाद में उसे छोड़ दिया गया था।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर पर यह आरोप लग रहा है कि भारत में लोकसभा चुनाव से पहले ‘बालाकोट’ जैसी कार्रवाई फिर से हो सकती है। पाक काकर ने बालाकोट स्ट्राइक को याद करते हुए भारत को गीदड़भभकी दी कि अगर 2019 के बालाकोट स्ट्राइक की तरह के नोमिनल चुनाव से पहले फिर कोई एटेक किया गया तो पाकिस्तान जवाब देगा।

काकर ने भारत की ओर से दिए गए एक संदेश में कहा, किसी ने हमारी जमीन पर हमले की कोशिश की तो पाकिस्तान का बिल्कुल इरादा ही है, जैसा कि उन्होंने 2019 में किया था। हम उनके दस्तावेज़ों को मारेंगे। हम उसी अंदाज में जवाब देंगे, ना तो हमारी गोलियां पुरानी हैं और ना ही संकल्प खराब हुआ है। हमारे पास कैप्सूल भी नए हैं और हमारा दृढ़ संकल्प भी काफी नया और ताजा है। किसी को भी पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के बारे में भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

पाक ने कश्मीर पर कही ये बात

काकर ने एक अहम मुद्दे पर एक बार फिर से बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को मिलकर कश्मीरी विवाद सुलझाना चाहिए। कश्मीर विवाद के समाधान तक संघर्ष की संभावना बनी रहेगी और ये तनाव भी बढ़ सकता है। काकर ने कहा कि कश्मीर का विनाश केवल कश्मीर के लोगों और भारत पाकिस्तान के लिए ही नहीं है बल्कि ये पूरे दक्षिण एशिया को प्रभावित करता है।

‘प्रवीण के चुनाव पर खतरा का खतरा’

पाकिस्तान में अगले महीने चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों के बारे में पाकिस्तान के ऑपरेशन में हुए हमले के बारे में काकर ने कहा कि इन हमलों का ख़तरा पाकिस्तान पर है। विशेष रूप से दक्षिणी खबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के कुछ क्षेत्रों में साजि़ल का दर दिखाई दे रहा है। यह डॉ. एनआईसीओएल पोर्टफोलियो के लिए कठिन काम है। काकर ने कहा कि कुछ मुश्किलें हैं, लेकिन पूरी तरह से चुनावी प्रक्रिया के समर्थक पर सवाल उठाना सही नहीं है।

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