सौरभ तिवारी/बिलासपुरः भारत के कई राज्यों में मकर संक्रांति को अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। पंजाब में इसे लोहड़ी तो कहीं, बंगाल में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है। नाम भले ही अलग हो, लेकिन इसका मतलब एक ही है। इस दिन सभी लोग मिलकर पतंग उड़ाते हैं। इस दिन तिल के लोध और घटक बनाये जाते हैं। इन सभी एनी के बीच, पश्चिम भारत में इस दिन काले रंग के कपड़ों के मॉडल भी कस्टम हैं। इस दिन काले कपड़े काले होते हैं, इसके बारे में हमें प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य क्यों पंडित डास्त्रेय होस्केरे जी ने बताया है।
मकर संक्रांति के दिन अक्सर लोग रंग-बिरंगे कपड़े और पीले रंग के आभूषण दिखाते हैं। जोक भारतीय परंपरा के अनुसार शुभ माना जाता है, लेकिन पश्चिम भारत में मकर संक्रांति के दिन काले रंग के वस्त्र पहने जाते हैं। हिन्दू धर्म में किसी भी त्योहार के लिए काला रंग अशुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य की उत्तर दिशा में प्रवेश करने के कारण इस दिन व्यक्ति के ऊपर कोई संकट नहीं आता और व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, इसलिए काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
ज्योतिष में यह है कारण
पंडित डास्त्रेय होस्केरे ने ज्योतिष संदर्भ से बताया कि सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहा है। मकर एक शनि प्रधान राशि है और शनि की दृष्टि काले रंग की है। इसलिए सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से उत्तरायण होने के कारण काला वस्त्र धारण करना पड़ता है।
काले नीले का दान शुभ
इसके अलावा इस दिन काले रंग का दान भी किया जाता है। छतरी, कंबल आदि चीजें दान की जाती हैं। काले तिल का दान भी किया जाता है. इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस प्रगति आति है.
नोटः यहां दी गई जानकारी सिर्फ ज्योतिष से बातचीत पर आधारित है। इसकी न्यूज 18 पुष्टि नहीं करता है.
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पहले प्रकाशित : 11 जनवरी 2024, 10:38 IST
