देश राजधानी, ग़रीब, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी प्रदेश, सभी पहाड़ी इलाक़ों सहित पूरे भारत में सूखे की ठंड पड़ रही है। इससे बचने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। घर के अंदर स्टॉक में सामान बनाए रखने के लिए ज्यादातर लोग स्टॉक में रहते हैं, प्लास्टिक बेचते हैं, अंगीठी जलाते हैं। जहां ये सभी उपाय गर्माहट का निशान हैं। वहीं, कई बार येशी चीजें मौत का कारण भी बन जाती हैं। फ़्लोरिडा के द्वारका क्षेत्र में बुधवार को ठंड से बचने के लिए जलाई गई अंगीठी एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई। घटना में दम घुटने से पति-पत्नी की मौत हो गई, जबकि उनका दो महीने का पति-पत्नी बाल-बाल बचे थे।
फ़्लोरिडा पुलिस ने बताया कि भगवान प्रदेश के मानव और नियोगी में ग़ौर-बेसर बनाकर ऐसा किया गया था। उनका परिवार द्वारका में एक कमरे के सेट में रहता था। ठंड से बचने के लिए कच्चे माल के विश्वसनीय पर भरोसा किया गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। हालाँकि, जब गहने के कारण रेस्ट परशानी हुई तो उसने जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया। उसकी आवाज से दुखी पड़ोसियों की नींद खुल गई। काफी देर तक खटखटाने पर भी जब दरवाजा नहीं खुला तो वे खिड़की वाले घर में घुस गए। फ्लैट्स कि देखा सुपरमार्केट पर एबेसोमी पढ़े थे। पुलिस मशीनरी पर सूचना बैठक. थोक और सामाने को तत्काल अस्पताल भेजा गया। डॉक्टर्स ने डेमोक्रेसी को मृत घोषित कर दिया, जबकि दावा सुरक्षित है।
पुलिस ने बताया कि अंगीठी बंद कमरे में जलाई गई थी। इसमें कोई सिद्धांत और विचारधारा नहीं थी। जलती अंगीठी के कारण मोनोम का दम घुट गया। फ़ोरेंसिक टीम के अनुसार, दोस्ती के कारण कमरे में रंगहीन और गंधहीन गैस कार्बन मोनोऑक्साइड घातक स्टॉकर तक जमा हो गया था। ऐसी ही एक घटना दो सप्ताह पहले हुई थी। असल में, 36 साल पहले दो सगे पिता ने ठंड से बचने के लिए कमरे में आग जलाई थी। आग के कमरे में आग लग गई और आतंकवादी की मौत हो गई। डॉक्टर्स के अनुसार, पहले कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड ऑक्साइड के कारण परमाणु का दम घुटा। इससे उन्हें आग लगने का निशान ही नहीं हुआ।
या कैडी वुड की अंगीठी को एक कमरे में रखा गया है और ऑस्ट्रीजन की कमी हो रही है।
बंद स्थानों पर अंगीठी के नुकसान जारी हैं?
इस देश की राजधानी की सिर्फ दो घटनाएं हैं। हर साल जब क्रैके की ठंड खत्म होती है तो ऐसी अनोखी घटनाएं सामने आती हैं। ठंड के मौसम में ठंड के मौसम में ठंड के मौसम में ठंडक या ठंडक का एहसास होना बहुत आम बात है। इससे हॉटहाट जरूर रहता है, लेकिन जरा सी चतुर्थी दम घोट हो सकता है। बता दें कि किसी कमरे में ऑक्सीजन की कमी, सांस लेने में तकलीफ, सांस की तकलीफ, सिर दर्द से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा आपकी आंखें भी खराब हो सकती हैं। सामान और ऑटोमोबाइल के सीधे संपर्क में आने पर ज्वालामुखी का खतरा भी बना रहता है। अगर किसी कमरे में एस्टीमेट की सही साज़िशें नहीं हैं तो अँगीठी ही नहीं लॉज और स्टेलर भी घातक साबित हो सकते हैं।
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कार्बन, मोनोऔर डाइऑरायडाइड में अंतर
यदि तेल, कोयला या लकड़ी पूरी तरह से ना जले और स्मोक्ड बने तो कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है। वहीं, बंद जगहों पर लगातार आग लगने से, ब्लाउज़ार या बाज़ार में गिरावट की वजह से वहां ऑरेस्टीज़न धीरे-धीरे ख़त्म होती जा रही है। फिर यही कार्बन डाइऑक्साइड में तबदील हो जाता है।
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अंगीठी लेखन से हो जाता है एस्फिक्सिया
अंगीठी हिलाया या फिर शोर मचाते हुए, स्टूडियो की ओर से एस्टव स्टूडियो ना हो तो कमरे में ऑरिजन कम होता जा रहा है। ऐसी जगह पर मौजूद लोगों के शरीर में ऑक्सीजन की मूर्ति धीरे-धीरे कम दिखती है। ऐसे होता है एस्फिंक्सिया दिल, दिमाग और दूसरी विचारधारा में ऑक्सीजन की गोली मार दी जाती है। जब दिल में खून की आपूर्ति कम होती है तो दूसरे ऊतक की सही मात्रा में ब्लड पंप करने में दिक्कत होती है। इससे दिल का गंभीर दौरा पड़ता है। ऐसे पदार्थ का उपचार संभव नहीं हो पाता और उसकी मृत्यु हो जाती है।
बंद जगह पर शैलोअर या प्लास्टर से निकाली गई ऑस्ट्रेलियन गैस की मात्रा बढ़ जाती है और कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है।
दम मत करो पर संदेह ना, ये काम
कई बार लोग दम घुटने पर डर जाते हैं। आस्था में सांसें और दर्शन तेज हो जाता है। ऐसे में सांस लेना मुश्किल हो जाता है और असाध्य रोग होना शुरू हो जाता है। अगर ऐसा हो तो उस जगह से क्लोजर खुली जगह पर जाना चाहिए। बता दें कि अगर किसी जगह पर कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा अधिक है तो आपको आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, उल्टी और सिरदर्द जैसी बीमारियां होने लगेंगी। यदि आपको ऐसा लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, एनेस्थेमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, स्किन एलर्जी की स्थिति वाले लोगों के साथ-साथ बुजुर्गों और दांतों को भी एंग्जायटी से दूर रखा जाना चाहिए।
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पहले प्रकाशित : 12 जनवरी, 2024, 16:15 IST
