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सेहत का खजाना हैं ये पेड़, शुगर में पत्ते, पत्तों से चेहरे पर निखार, खुजली होती है खत्म, कब्ज रहता है दूर


लक्षेश्वर यादव/जांजगीर चांपा: नीम का पेड़ तो आप सभी जानते होंगे। यह सदाबहार वृक्ष है। इसकी कलाकृति खुरदरी भूरे रंग की होती है। नीम की नीली चमकीली हरे रंग की और प्रत्येक सींक पर नव पर्णक ऊपर से चमकीला नीचे से खुरदरा होता हुआ दिखाई देता है। इसकी एक तहनी में करीब 12-15 पत्ते मिलते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं। नीम के पेड़ के हर भाग में रक्तशोधक गुण पाए जाते हैं। आइए जानते हैं आयुर्वेद चिकित्सक ने नीम के क्या फायदे बताए हैं।

जांजगीर जिला हॉस्पिटल के आयुर्वेद डॉक्टर फणींद्र राधाकृष्णन दीवान ने बताया कि नीम का प्रयोग बहुत ही प्राचीन काल से किया जा रहा है। इसके चाचे, पत्ते, ताहनी सभी का उपयोग औषधीय रूप में किया जाता है। विशेष रूप से त्वचा के बर्तनों में इसका प्रयोग किया जा रहा है। नीम का तेल आप त्वचा में खुजली, दाद, या अन्य त्वचा संबंधी उपचार के लिए उपयोग कर सकते हैं। नीम का व्यापारी का रस पिया जा सकता है। इससे कई रोग भी दूर होते हैं।

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कई बेहतरीन चीजें
उन्होंने बताया कि नीम में एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक गुण होने के कारण यह मूल रूप से ब्लड सा में उपयोगी है। इससे आपकी त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं और पेट भी साफ होता है जिससे पूरा शरीर स्वस्थ रहता है। इसके अलावा शुगर में भी यह बहुत स्वादिष्ट है। नीम का दैनिक प्रयोग करने से शुगर लेवल कम होता है। दांतों के दर्द से राहत पाने के लिए नीम का दांत लगाएं। मसूड़ों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। और मसूड़ों में होने वाले संक्रमण जिसे पियारिया कहते हैं उसके इलाज में मदद मिलती है। नीम का पत्ता दैनिक अख़बार से भी बहुत फ़ायदा होता है।

यहां जानें नीम के फायदे

  • नीम के शीतल छाया में विश्राम करने से शरीर स्वस्थ रहता है। साईंकाल में इसके जमे हुए रेस्तरां से मच्छर भाग जाते हैं, रात में नींद अच्छी आती है और वातावरण भी शुद्ध रहता है।
  • इसका सबसे अच्छा हॉस्टल चौबाने से हाजमा ठीक रहता है।
  • नीम की खेती को सुखाकर अनाज में रखने से अनाज खराब नहीं होता है।
  • नीम की नाव में पानी में लाहकर स्नान करने से कई फूलों से मुक्ति मिल जाती है, सिर स्नान से बालों की झाँटें मर जाती हैं।
  • नीम की जड़ को पानी में घिसकर लगाने से कील मुंहासे मिट जाता है। और चेहरा सुन्दर हो जाता है
  • नीम के शिष्यों का रस खून को साफ करता है, और खून की तलाश भी करता है इसे 5 से 10 तत्वों की मात्रा में प्रतिदिन खाना चाहिए

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