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डॉक्टर कृपया सावधान रहें! बिना कारण अज्ञात लिखित एंटीबायोटिक तो खैर नहीं, सरकार ने दी कड़ी चेतावनी, केमिस्ट भी नहीं दे सकती दवा


उत्तर

एंटीबायोटिक्स के विनाश के कारण सरकार ने उठाए सख्त कदम।
सभी मेडिकल वकीलों की अपील।

एंटी-बायोटिक्स पर डॉक्टरों को सरकार की चेतावनी: एंटीबायोटिक्स दवाइयों से प्रयुक्त बैक्टीरिया जनित स्टैटिकल को ख़त्म करने के लिए किया जाता है। लेकिन जो बीमारी वायरस या फंगस से होती है, उनमें भी ब्लडबैल से लोग एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक ​​कि दवा की दुकान में केमिस्ट भी एंटीबायोटिक अपने मन से देते हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि एंटीबायोटिक्स आहार अपना असर दिखाता है। जब वास्तव में शरीर को एंटीबायोटिक्स दवा की आवश्यकता होती है तो वह अवलोकन करना शुरू कर देता है। इन समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी विद्वानों से कहा है कि वे जब भी किसी को एंटीबायोटिक दवा देते हैं तो इसका कारण और इसके परिणामों के बारे में अनिवार्य रूप से बताएं। इतना ही नहीं अगर एंटीबायोटिक दवाएं लिखी हैं तो मरीज को सही तरीकों से बताया जा रहा है।

शिक्षाविदों को बताया जाएगा सब कुछ

हमारी सहयोगी वेबसाइट सीएनबीसी टीवी 18 द्वारा स्वास्थ्य सेवा के डॉक्टर डॉ. से प्राप्त पत्र। अतुल गोयल ने मेडिकल लेबल के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे एंटीबायोटिक्स दवा को समय-समय पर अनिवार्य रूप से सावधानी बरतें और जब मरीज को एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दी जाए तो यह अनिवार्य रूप से बताएं कि यह दवा किसलिए दी जा रही है और इसके क्या परिणाम हैं होगे. यह भी बताएं कि इस दवा को क्यों दिया जा रहा है और इसे कितने दिनों तक खाना चाहिए। यह बात विशेष रूप से दार्शनिक पर लागू नहीं होती बल्कि फर्मासिस्ट दवा पर भी लागू होती है। स्वास्थ्य सेवा के डीजे केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीनस्थ है।

केमिस्ट बिना पर्ची नहीं बेचारा ये दवा

मेडिकल सुपरमार्केट को भेजा गया यह पत्र प्रति सीएनबीसी टीवी 18 के पास भी मौजूद है। इस पत्र में कहा गया है कि क्रिस्टल एंड स्कोच रूल के विवरण एच और एच 1 का अक्षरशः रखा गया है जिसमें बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के केमिस्ट द्वारा एंटीबायोटिक्स की बिक्री को प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा दवा दस्तावेज़ समय वैज्ञानिकों के एंटीमाइक्रोबियल दवा के नेतृत्व के सभी पहलू और प्रभाव के बारे में बताना आवश्यक है। पत्र में यह भी कहा गया है कि एंटीबायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल किया जाता है और अधिक इस्तेमाल की आवश्यकता होती है। हालाँकि दशकों बाद कुछ एंटीबायोटिक्स के इज़ाद होने की प्रारंभिक संभावना है, लेकिन अब भी यह पाइपलाइन में है। ऐसे में एंटीबायोटिक औषधियों का विवेकपूर्ण उपयोग ही एकमात्र विकल्प है।

दवा के घटित होने से 12 लाख लोगों की मृत्यु हुई

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) यानी एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन दुनिया भर के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि 2019 में 12.7 लाख लोगों की मौत हो गई और 49 लाख लोगों की मौत हो गई और 49 लाख लोगों की मौत हो गई। इससे अन्य कई तरह के संकट भी बढ़े हैं। एंटीबायोटिक्स के होने से मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। जब किसी को वास्तव में परावर्तित प्रभाव होता है तो औषधियों का प्रभाव नहीं होने के कारण रोग ठीक होने में बहुत समय लग जाता है।

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