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भगवान की दवा पर उगने वाली सब्जी है बड़ी कमाल की, मसालों की तलाश के लिए रामबाण


कृष्ण कुमार, नागौर। ककोड़ा यानी छोटा करेला जो एक सब्जी है ये राजस्थान में मानसून के मेड्स पर लगता है. यह बारिश का मौसम हरा और कच्चा होता है लेकिन जैसे ही बारिश का मौसम खत्म होता है तो यह पककर लाल होता है। यह खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है. वहीं इस सब्जी का उपयोग आयुर्वेदिक मसालों में भी किया जाता है।

लाल ककोड़ा सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा क्योंकि जब भी ककोड़े की बात होती है तो हरे ककोड़े/छोटा करेला की याद आती है. जी हां…हरा ककोड़ा पाकर अपना रूप बदल लेते हैं इसे ही लाल ककोड़ा/लाल करेला कहते हैं। आजकल नागौर में इस सब्जी का इस्तेमाल किया जा रहा है. खास बात यह है कि इसके सेवन से शरीर को कई फायदे होते हैं. इसका मुख्य उपयोग सब्जी बनाने और आयुर्वेद की दवाइयाँ बनाने में किया जाता है।

आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉक्टर विनय ने बताया कि छोटा करेला या ककोड़ा का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है। मधुमेह से पीड़ित नमक के लिए यह करेला एक रामबाण इलाज है। मधुमेह को इसके पचांग यानी फूल, जड़वत, पत्ते, तने व फल का उपयोग करके मधुमेह रोगियों को दवा दी जाती है। यदि पित्त की मात्रा बढ़ती है तो यह पित्त कारक के रूप में कार्य करता है।

यह पेय पदार्थ की मात्रा को कम करता है। इसके सेवन से आंखों को फायदा होता है. क्योंकि विटामिन ए व सी होता है इसमें जूस पीने से व्यक्ति की पाचन शक्ति भूख लगना शुरू हो जाती है। ककोड़ा/करेला का उपयोग त्वचा से संबंधित स्टालों के उपचार के लिए किया जाता है।

अधिक सेवन से हो सकता है नुकसान
आयुर्वेदिक डॉ. विनी ने बताया कि इसका अधिक मात्रा में सेवन शरीर से ड्रिक्सनेस आ जाता है। आप काली मिर्च, सोंठ और पीपली का सेवन कर सकते हैं। चावल और घी के समग्र सेवन से इस करेले की अधिक मात्रा के सेवन की मात्रा को कम किया जा सकता है। अगर आप करेला/ककोड़ा/लाल करेला का सेवन करते हैं तो पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। उनके अनुसार आप पाउडर या अन्य सामग्री का सेवन कर सकते हैं।

टैग: मधुमेह, स्वास्थ्य सुझाव, नागौर समाचार, राजस्थान समाचार



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