रामकुमार नायक/रायपुर. भारत देश में अनेक राज्य हैं। हर राज्य की एक अलग विशिष्टता है और कहा जाता है कि अनेकता में एकता, यही भारत की विशेषता है। आज हम आपको छत्तीसगढ़ और उड़ीसा प्रांत की प्रसिद्ध संबलपुरी प्रथा के बारे में बता रहे हैं। इसे देखते ही आप समझ जाएंगे कि यह किसी राज्य की व्यापारिक व्यावसायिक पेशकश है। इन दिनों छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के भंवरपुर निवासी विनोद देवांगन की पत्नी वृंदावती देवांगन के साथ संबलपुरी गरीबी बुझ रहे हैं।
जागृति बुनकर समिति मर्यादित सुंदरपुर के अध्यक्ष रमेश कुमार देवांगन ने बताया कि संबलपुरी में बहुत प्रतिभा है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले धागा तैयार किया जाता है। फिर बने धागे को रंग दिया जाता है फिर एक-एक वगेरे को महान से बना दिया जाता है। बाजार में अच्छे सामानों की वजह से बुनेकरों की अच्छी बिक्री हो रही है। भौंरापुर के बुनेकर संबलपुरी पहलवान बेंचने ओडिशा प्रांत के बरगढ़ जाते हैं, वहां सभी सा गेहूं अच्छे दाम में बिकते हैं। एक संबलपुरी रोजगार की कीमत 4 हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक है। बुनकरों को प्रति व्यक्ति 1500 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक मिल जाता है।
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कैसे तैयार होती है संबलपुरी
रमेश कुमार देवांगन ने आगे बताया कि एक संबलपुरी बेरोजगारी बनने में दो-तीन दिन ही लगे हैं। यानी बुनेकर दो दिन में तीन हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं। यह संबलपुरी प्लांट ज्यादातर ओडिशा के भुनेश्वर, कटक, बरगढ़ जैसे अन्य शहरों में सबसे ज्यादा बिकता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की राजधानी में भी संबलपुरी साड़ियों की अच्छी मांग है। बुनेकरों द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से गणेश वस्त्र, वस्त्र, वस्त्र जैसे अन्य परिधान तैयार करने की मंजूरी दी जा रही है। इन बुनेकरों द्वारा बनाए गए सा स्ट्रेंथ से आप राजधानी रायपुर के बिलासा शो रूम से भी खरीद सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए समिति के अध्यक्ष रमेश कुमार देवांगन के मोबाइल नंबर 96852 06607 पर संपर्क कर सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 27 जनवरी, 2024, 20:12 IST
