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पहली बार नाबालिग को मिली उम्रकैद की सज़ा, कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, दोस्त को भी मिली जेल


योगेश कुमार यादव

बलौदाबाज़ारी. छत्तीसगढ़ में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है जहां एक नाबालिग को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। पुराना मामला बलौदा बाजार जिले के नासिक क्षेत्र का है। 7 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में कोर्ट ने एक महिला और नाबालिग समेत 3 लोगों को सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रशांत पाराशर की अदालत में हुई। 25 मई की दोपहर को रिहाना क्षेत्र के पौंसरी गांव में एक 7 साल की बच्ची के साथ अपने ही दोस्त के घर पर दुष्कर्म किया गया।

वहां के एक म्यूनिसिपल भाई ने उसे ड्रायकर के घर के दूसरे चेयेर में बने रहने के लिए ले जाया गया। इसके बाद समझौता किया गया। जब बच्ची हो गई तो उसका गला दबा दिया गया। इसके बाद शव को शामिल करने के लिए अपने दोस्त जगमोहन को बुलाया। दोनों ने मिलकर बच्ची के शव को घर के पास ही बनाकर शवों में फेंक दिया।

फॉरेंसिक टीम ने की थी जांच

मासूम बच्ची का शव नाव में तैर रहा था। पुलिस ने जब उसके शव को बाहर निकाला तो बच्ची के हाथ और पैर के पंजों से अलग हो गए। नाक से खून निकल रहा था. इसके बाद पुलिस ने शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। किताब में यह खुलासा हुआ कि बच्ची का पहले अपहरण कर लिया गया था। उसके बाद ग्लास शॉप मर गयी। फिर बच्ची के हाथ पैर को मारकर फेंक दिया गया. वहीं इस मामले में रायपुर से भी फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया था.

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पुलिस ने जब इस मामले की तफ्तीश की तो पता चला कि 7 साल की मासूम बच्ची अपनी सहेली के घर गई थी। इसी दौरान एक दोस्त के रूप में काम करने वाले भाई ने उसे अपने साथी में खींच लिया और दरिंदगी की। जब बच्चा पैदा हुआ तो उसका गला घोंट दिया गया। फिर अपने दोस्त के साथ मिलकर मासूम के शव को फेंक दिया था।

असल में, पूरे मामले में अदालत के सामने 29 गवाहों की गवाही दर्ज की गई थी। दस्तावेज़ अधिकारी महेश ध्रुव कुमार ने पर्यवेक्षक और बलौदा बाजार पूंजीपति सुभाष दास के खिलाफ़ मुकदमा दायर किया था। गोदाम के बचाव पक्ष और कार्यक्रम पक्ष के डिजिटल को सुनने के बाद बलात्कार और हत्या साबित हुई। लोक अभियोजक समीर अग्रवाल का कहना है कि अपराध की स्थिति को देखते हुए पोक्सो अधिनियम में संशोधन किया गया है। इसके तहत अब 16 साल के नाबालिग पर भी वयस्कों की तरह का मामला दर्ज किया गया है। शर्त यह है कि मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।

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