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सेप्सिस रोग क्या है? आईसीयू में भर्ती मरीज पर क्यों बना रहता है इस बीमारी का खतरा, जानें डॉक्टर की राय


अविश्वासी आजमी/देहरादून। अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत ज्यादा खराब हो तो उसे शिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया जाता है। 24 घंटे आज़मिकों की निगरानी में रहने के बावजूद भी मरीज कई बार स्वस्थ नहीं हो पाता। स्वास्थ्य वैज्ञानिकों की राय तो आईसीयू में मौजूद भर्ती भी एक प्रमुख कारण है जो हो सकता है। यह संक्रमण वायरस, परजीवी और कवक के कारण बनता है।

अगर आप किसी खिलाड़ी को देखने जा रहे हैं, तो कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। छात्रों में प्रवेश से पहले मास्क लगा लें, हाथों को भव्य से साक्षात कर लें, जुलूस के जूते आउट आउट हो गए और नामांकन हो तो अस्पताल प्रशासन की तरफ से मिलने वाला गांव पहन लें। साथ ही स्टूडेंट रूम की किसी भी चीज़ को बुक करें। बाहर हाथों पर अच्छे से साफ करें और हो सके तो अपने कपड़े बदल लें। इस तरह की कई सावधानियां तीमारदारों को कलाकारों को देनी चाहिए।

सेप्सिस का बना रहना खतरनाक है
उत्तराखंड की राजधानी दून अस्पताल के सीएमएस और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा है कि मरीज की जब शीशियां सबसे ज्यादा होती हैं, तो उसे स्टूडेंट में रखा जाता है ताकि वह डॉक्टरों की निगरानी में रहे। इस दौरान उसे कई तरह के इंफेक्शन का खतरा हो जाता है। सिर्फ सांस की बीमारी से ही उसे हृदय, किडनी, दांत और दांतों के संक्रमण का खतरा होता है। छात्र में भर्ती मरीज़ में ऑक्सीजन लेवल कम होता है। इससे मरीज के सभी काम प्रभावित हो सकते हैं। छात्र में सेप्सिस नाम की बीमारी होना भी सामान्य बात है। पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित रह रहे मरीज को दूसरे तीसरे तरह के संक्रमण का खतरा बना रहता है इसलिए इस दौरान कुछ सावधानियां दी जाती हैं।

छात्र-छात्राओं की भर्ती से बार-बार सही नियुक्ति नहीं
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा है कि जब कोई भी मेहमान उसे देखने के लिए उसके पास जाता है, तो अपने उपभोक्ता-चप्पल को बाहर निकाल देना चाहिए। इसके अलावा हाथ से बने सामान और मास्क की दुकान ही काम करती है। वहीं सिर को ढलने के लिए भी एक कैप दी जाती है. इसके अलावा मरीज़ से बार-बार मिलना नहीं चाहिए। बर्न असिस्टेंट में भर्ती भर्ती को त्वचा के माध्यम से संक्रमण का खतरा रहता है, इसलिए उन्हें नेट कवर किया जाता है।

आग लगना का खतरा
हाल ही में एक ताजा मामला गुजरात से सामने आया था, जिसमें एक मरीज़ की भर्ती थी। उसे बीड़ी पीने का मन था, जिसके बाद वह बीड़ी सुलगाता है तो अचानक आग लग जाती है। छात्र में मौजूद गैस के संपर्क से आग लग गई थी।

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अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, सिद्धांतों से जुड़ी बातचीत का आधार है। यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से सलाह के बाद ही किसी चीज का उपयोग करें। लोकल-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।



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