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एंटीबायोटिक्स साइड इफेक्ट्स: एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट्स: साबित हो रहे हैं 90 प्रतिशत एंटीबायोटिक्स… एम्स के पूर्व निदेशक ने कही दी बड़ी बात


एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव: एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक मात्रा में उपयोग का असर अब दिखना शुरू हो गया है। वैज्ञानिकों की राय तो देश की 90 प्रतिशत एंटीबायोटिक दवाएँ अब साबित हो रही हैं। कोरोना के बाद देश में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल सबसे पहले तुलना में सबसे ज्यादा लगा है। अगर 10 साल की उम्र की बात करें तो प्रति व्यक्ति 30 प्रतिशत एंटीबायोटिक दवा का लोग सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। बता दें कि भारत में सर्दी, खांसी, सर्दी समेत कई तरह के वायरल रिएक्शन में डॉक्टर 95 प्रतिशत एंटीबायोटिक दवा लेने की सलाह देते हैं। जबकि, डॉक्टरों में विशेष रूप से अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों में वायरल दवाओं में एंटीबायोटिक दवा के बराबर नहीं दी जाती है।

भारतीय डॉक्टर भी तेज बुखार और डायरिया में भी एंटीबायोटिक दवा के डॉक्टर की सलाह देते हैं। लोग अपने मन से भी केमिस्ट शॉप पर एंटीबायोटिक्स की खरीद फरोख्त करते हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि खुद डॉक्टर ही देखने लगे हैं कि अब एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस अपना असर दिखा रहे हैं। ऐसे में जब वास्तव में शरीर में एंटीबायोटिक्स दवा की आवश्यकता होती है तो उसे रोकना आवश्यक होता है।

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भारतीय डॉक्टर भी तेज बुखार और डायरिया में भी एंटीबायोटिक दवा के डॉक्टर की सलाह देते हैं।

एंटीबायोटिक दवा का असर कम क्यों हो रहा है?
पिछले दिनों ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बड़े कदमों ने सभी अनुयायियों से कहा था कि जब भी वे एंटीबायोटिक दवाओं को लिखते हैं तो इसका कारण और इसके परिणामों के बारे में अनिवार्य रूप से बताया जाता है। इतना ही नहीं अगर एंटीबायोटिक दवाएं लिखी हैं तो मरीज को सही तरीकों से बताया जा रहा है।

एंटीबायोटिक्स का प्रयोग कब करना चाहिए?
एंटीबायोटिक औषधियों का प्रयोग दुनिया भर के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। दिल्ली एम्स के पूर्व निदेशक डॉ एम सी मिश्रा कहते हैं, ‘यह हमारे देश के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है। किसी को कोई दोष देना ठीक बात नहीं है. इसमें डॉक्टर, केमिस्ट, पब्लिक और सरकार सब दोषी हैं। हम नवजात शिशुओं की उत्पत्ति नहीं कर रहे हैं और दूसरी तरफ से इसका उपयोग किया जा रहा है। यहां तक ​​कि एलोपैथ के साथ-साथ अब आयुर्वेद वाले भी इसका खूब इस्तेमाल करते हैं। फार्मास्युटिकल, अमेरिका और वैज्ञानिक जैसे देश में एंटीबायोटिक दवा बिना डॉक्टर के आधार पर आप नहीं खरीद सकते हैं। लेकिन, यहां आपको हर जगह मिल जाएगा।’

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एंटीबायोटिक दवाओं के सही उपयोग के बारे में जानकारी तब तक नहीं होनी चाहिए जब तक इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। (छवि-कैनवा)

क्या कहते हैं सीनियर डॉक्टर
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेश कुमार कहते हैं, ‘किसी भी मरीज को एंटीबायोटिक्स की जरूरत है। रोगी को कितनी खुराक लेनी चाहिए यह जानना और जरूरी है। एंटीबायोटिक आमतौर पर 3, 5 और 7 दिन के मरीज को बीमारी के हिसाब से दिया जाता है। कुछ लोग खुद भी इसका सेवन करना शुरू कर देते हैं। इससे शरीर में कई तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे लिवर, किडनी और शरीर के अन्य स्तरों में संक्रमण भी हो सकता है। इसलिए, एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।’

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कुलमिलाकर एंटीबायोटिक औषधियों के सही उपयोग के बारे में जबतक जानकारी नहीं हो तब तक इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। एंटीबायोटिक लेने के बाद खान-पान में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से क्लासी भोजन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल क्षति शुरू हो सकती है।

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