संजय यादव/बाराबंकी: धरती पर हमारे आसपास ऐसे हजारों पेड़-पौधे मौजूद हैं, जिनके औषधीय गुणों के कारण कई औषधियाँ बनाई जाती हैं। आयुर्वेद में ऐसे पेड़-पौधों का बहुत महत्व है। आयुर्वेदिक औषधि जड़ी बूटी की बात होती है, तो अक्सर तुलसी, जड़ी बूटी, एलोवेरा की सबसे ज्यादा बात होती है। लेकिन ऐसे उपचारों का उपयोग कई स्थिर उपचार औषधियों के निर्माण में किया जाता है। ऐसा ही एक पौधा है सप्तपर्णी, जिसमें विटामिन, विटामिन सहित कई पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। ये हमारे शरीर के लिए बेहद चमत्कारी है। इसके अवशेष, फल, बीज कई फूलों के उपचार में रामबाण औषधि साबित हुई है।
सप्तपर्णी वृक्ष 130 फीट तक बढ़ सकता है। यह एक जादुई पेड़ है. यह पेड़ अक्टूबर के महीने में फूल खिलते हैं। इस औषधि के फूलों से रात के समय विशेष प्रकार की तेज संरचनाएं बनती हैं जो केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई आदर्शों में पाई जाती हैं। इस वृक्ष को अशुभ और शैतान के निवास के रूप में जाना जाता है। सप्तपर्णी वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके छात्र, छात्राएँ, बीज का उपयोग कई गंभीर विक्रेताओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। इसका पेड़ काफी बड़ा होता है. इसमें लंबी बैलगाड़ी और सफेद फूल होते हैं। यह आपको पार्क और सड़क के किनारे आराम से मिलेगा। सप्तप्राण उपचार के बहुत सारे औषधीय गुण हैं। इसका उपयोग आप कई बैस्टलेस से मुक्त पा सकते हैं।
शरीर को शीतलता सप्तपर्णी प्रदान करती है
आयुर्वेद के अनुसार सप्तपर्णी वृक्ष हमारी सेहत के लिए काफी माना जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल, वायरल बुखार, एलर्जी, हृदय रोग, अल्ट्रासाउंड से संबंधित है। यह मलेरिया से जुड़े बुखार के साथ ही संक्रमण के कारण से होने वाले बुखार को भी कम करने में मदद करता है। सप्तपर्णी शरीर को शीतलता प्रदान करने में सहायक होती है।
इन चैलेंज में होता है इस्तेमाल
जिला अस्पताल स्ट्रॉबेरी के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा (मेडिकल मेडिसिन) ने बताया कि आयुर्वेद में सप्तपर्णी औषधियों के कई नाम प्रचलित हैं जैसे सातवीण, सप्तपर्ण, हातिम, यक्षिणी वृक्ष, छितवन, व सातौना। अंग्रेजी में इसे डेविलट्री, डिटाबार्क या शैतानवुड कहते हैं। ये हार्ट में जो ब्लड मसल्स होते हैं उनमें कोलेस्ट्रोल का पोषण कम हो जाता है। हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा दुर्बलता कम करने, घाव ठीक करने, मलेरिया, नपुंसकटा, पीलिया और कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए सप्तपर्णी को प्रभावशाली औषधि माना जाता है। पूर्वजन्म के बाद माता को उसके शिष्यों का रस पिलाया जाता है, जिससे दूध में वृद्धि होती है।
मलेरिया के उपचार में मलेरिया
डॉ. अमित वर्मा ने बताया कि सबसे पहले स्नेक कटर का उपयोग एंटीडोट के रूप में किया जाता है। किसी को दस्ता बहुत ज्यादा हो रहा है तो इसके छात्रों का आर्क स्टूडियो से दस्ता रुक जाता है। इसमें एंटी-माइबियल, एंटी-सटीक और एंटी-मैलेरियल गुण पाए जाते हैं जो मलेरियल के इलाज में मलेरिया साबित होते हैं।
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पहले प्रकाशित : 17 फरवरी, 2024, 19:54 IST
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