सन्नन्दन उपाध्याय/बलिया: कहते हैं जल ही जीवन है. हमारे स्वास्थ्य के लिए पानी की आपूर्ति की अत्यंत आवश्यकता है, लेकिन सही जानकारी के प्रयोग से शरीर में रोग उत्पन्न होते रहते हैं। पानी के अनगिनत नियम के बारे में तो सभी जानते होंगे, लेकिन पानी पीने के सही तरीके के बारे में कम ही लोग जानते होंगे। अगर सही तरीके से न पिया जाए पानी, तो हो सकती हैं ये कई परेशानियां
राजकीय आयुर्वेदिक नगर बलिया के चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियांक सिंह का कहना है कि जल ही जीवन है, लेकिन जल का सही उपयोग नहीं होने के कारण शरीर एक नहीं बल्कि उत्पादों से प्रभावित होता है। अगर पानी पर नियंत्रण कर सही तरीके से सेवन किया जाए तो आपके संबंधित गंभीर गंभीर जड़ से खत्म हो जाएगा। आयुर्वेद में पानी पीने के कई नियम बताए गए हैं कि अगर उस खाते से पानी का सेवन किया जाए तो बिना दवा के ही गंभीर अल्कोहल का सेवन किया जा सकता है।
खाना खाने से तुरंत पहले और बाद में पानी पीने से बचना चाहिए
पानी खाने से तुरंत पहले कभी नहीं खाना चाहिए या कभी भी तुरंत बाद में पानी नहीं खाना चाहिए। जो बहुत उपयोगी हैं भोजन के लिए समुद्रतट-समुद्र तट पर पानी की स्थापना होनी चाहिए। जो बहुत डबले अच्छे हैं वो खाने के बाद पानी पी सकते हैं।
किसको ढांचा चाहिए कम और किसको अधिक?
किसी को आंखों की समस्या हो तो पानी कम होना चाहिए। मधुमेह हो, मरीज़, खाना न पचता हो, बुखार हो या ठंडा हो, कम से कम पानी चाहिए। ठंडा पानी रेस्तरां में बहुत अधिक प्यास लगी हो। पित्त की अधिकता, रक्त की बीमारी या जो बहुत अधिक शराब पीते हैं, उन्हें अधिक पानी पी सकते हैं। पेट में चक्कर आते हैं वो भी ज्यादा पानी पी सकते हैं।
ये हैं गर्म पानी पीने के सही नियम और फायदे
पुराने बुज़ुर्ग, बुख़ार या सांस फूलने की बीमारी के पत्तों में गर्म पानी का सेवन होता है। गर्म पानी को लेबलकर जब आधा बच्चा जाए वह जठराग्नि को प्रदर्शित करेगा। पचाने में आसान होगा. मूत्र के दाह को शांत देखा जाए और वह पानी लेबलर चौथाई भाग का सेवन किया जाए तो उस पानी को हम स्वास्थ्य अंबु कहते हैं। यह श्वास का अतिसार, मधुमेह या शरीर में कहीं भी दर्द आदि से संबंधित प्रयोगशाला को नष्ट कर देता है। एक पॉश्चर से दूसरे पॉश्चर में गिरा गिरा कर ठंडा न करें इसलिए कि वह पानी भारी हो जाएगा और पचने में मुश्किल होगा।
पानी पात्र से किसी पात्र से बढ़ा हुआ। जब वह अपने आप ठंडा हो गया तब उसका सेवन किया। कई शर्तों को ठीक करने में मदद मिलती है। यह पानी जब पीने योग्य ठंडा होता है, तो स्वादिष्ट बर्तन के ऊपर पानी के कण जमा होकर धीरे-धीरे इस पानी में मिल जाते हैं जो बहुत होता है। शरद ऋतु में गर्म पानी का चौथाई भाग सेवन करना चाहिए। बसंत ऋतु में पानी को आधा शेष बचा रहना चाहिए। पानी का सही तरीका से सेवन करना शरीर के लिए रामबाण और औषधियों से भी अधिक है।
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पहले प्रकाशित : फ़रवरी 18, 2024, 16:46 IST
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, सिद्धांतों से जुड़ी बातचीत का आधार है। यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से सलाह के बाद ही किसी चीज का उपयोग करें। लोकल-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
