विशाल भटनागर/मेरठ. आयुर्वेद में अनेक प्राकृतिक प्राकृतिक औषधीय औषधियों के रूप में प्रयोग किया जाता है। मरुआ भी एक ऐसा ही पौधा है जो तुलसी की शाखा का माना जाता है। यह केवल स्वादिष्ट मसाले बनाने के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि कई स्वादिस्टों को दूर करने में भी सहायक है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर विजय स्वामी के मित्र हैं कि मरुआ के शिष्यों को चाय में ढाँचा बनाने से नजला-जुकम, खांसी जैसी स्थिति से मुक्ति होती है। यह मुंह की दुर्गंध और मसूद की बस्ती से भी राहत की बात है।
मरुआ के विक्रेता के कुछ अन्य फायदे
- पाचन क्रिया बेहतर बनी रहती है
- पेट के कीड़ों को दूर करता है
- डिज़ाक्स के दर्द से राहत मिलती है
हालाँकि, गंभीर महिलाओं और मधुमेह रोगियों को मरुआ के डॉक्टर का सेवन नहीं करना चाहिए।
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पहले प्रकाशित : 22 फरवरी, 2024, 19:05 IST
