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‘निपाह वायरस जान का बांग्लादेश स्ट्रेन बेहद खतरनाक, 10 में से 9 लोगों की ले गया है जान’ टॉप साइंटिस्ट ने बताया चेताया


नई दिल्ली. केरल में निपाह वायरस (Nipah Virus) की लहर के साथ ही पूरे देश में इसे लेकर खतरा पैदा हो गया है. इस बीच देश के टॉपिक महामारी विज्ञान डॉ. रमन खेड़कर ने शनिवार को न्यूज18 को बताया कि निपाह का बांग्लादेश स्ट्रेन शांति लेने की समस्या पैदा करता है और 10 में से 9 किशोर लोगों की जान ले लेता है। उन्होंने इसे लेकर लोगों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि इसके प्रसार पर रोक लगाने के लिए वायरस के स्रोत का पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान और संचारी रोग विभाग के पूर्व प्रमुख गंगाखेड़कर ने केरल में निपाह वायरस के पिछले तीन प्रकोपों ​​​​से देश में शुरुआत का प्रयास किया था। न्यूज 18 से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताएं सबसे पहले रोगी को रोगी की देखभाल करना, निपाह की उत्पत्ति का पता लगाना, आसपास के सभी लोगों की जांच करना, समुदाय को सहयोग करना और सहायता तैयार रखना है।’

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने 13 सितंबर को घोषणा की थी कि राज्य में निपाह के मामले बांग्लादेश स्ट्रेन के पाए गए हैं। इस स्ट्रेन के खतरे के बारे में विस्तार से बताते हुए गंगाखेड़कर ने कहा कि केरल में रह रहे इस स्ट्रेन को श्वसन संकट सिंड्रोम का कारण माना जाता है, इसकी प्रारंभिक भागीदारी में विश्राम को आराम देने का अनुभव होता है, जो आगे इतना गंभीर है हो जाता है कि उन्हें अलग-अलग पोस्ट पर रखें।

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उन्होंने कहा, ‘मलेशियाई स्ट्रेन उच्च मृत्यु दर के लिए जाना जाता है, लेकिन बांग्लादेशी स्ट्रेन उच्च मृत्यु दर के लिए जाना जाता है… इससे 10 लोगों में से लगभग 9 लोगों को मार दिया जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘इस वायरस के पहले प्रकोप के दौरान 23 मरीज़ों में से 89% की मौत हो गई थी।’

‘क्राइम डोमेन’ जैसा है निपाह का रहस्य
सीओवीआईडी ​​​​-19 महामारी के दौरान सरकारी ब्रीफिंग के दौरान भारत की शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान एजेंसी का सामना कर रहे गंगाखेड़कर का मानना ​​है कि निपाह वायरस के रहस्य को सुलझाना, पहले रोगी तक रेडियो, वायरस की उत्पत्ति का पता लगाना, उत्पत्ति से जुड़ी कहानियों को उजागर करना , उससे पहले मरीज़ के संपर्क में आए सभी लोगों का पता चला – एक ‘क्राइम डोमेन’ के रहस्यों से परदा का ध्यान आकर्षित हुआ।

साल 2018 के उस दौर में जब उन्होंने और उनकी टीम के सदस्यों ने 15 दिनों में निपाह वायरस के इस रहस्य का खुलासा किया, तो उन्हें याद आया और कहा, ‘यह एक पहेली की तरह है।’ मई 2018 में, ब्रिगेड की इस टीम ने पाया कि केरल के एक गाँव में पहली बार बीमार मरीज़ अपने घर की सफाई करते समय फल खाने वाले चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आए थे।

इसे याद करते हुए डॉ. गंगाखेड़कर कहते हैं, ‘केरल में, ये चमगादड़ बगीचों में फल खाने आते हैं। वर्ष 2018 और 2019 में, मई के महीने में इसका प्रकोप शुरू हुआ, जिससे पता चला कि वे गर्मियों में आम खाने आए हैं। ‘फलों को ढोकर खाने या कटे हुए फलों को न खाने की सलाह जारी की गई।’

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इसके बाद सितंबर 2021 में निपाह वायरस का एक और प्रकोप सामने आया। हालाँकि, COVID-19 महामारी के दौरान महामारी और वैश्वीकरण की प्रक्रिया से प्राप्त अनुभव निपाह से एक अद्भुत साबित हुआ, क्योंकि मास्क और सुरक्षा उपायों का पालन करने में सार्वजनिक नामांकन का स्तर बढ़ गया था।

गंगाखेड़कर ने इस बिंदु पर नए कनेक्शनों की पहचान करने की आवश्यकता पर जोर दिया, यह देखते हुए कि सितंबर में इसका प्रकोप फिर से हुआ है। वर्ष 2018 में, केवल तीन दिनों के भीतर 2,000 से अधिक लोगों ने ट्रैक किए जाने का ज़िक्र करते हुए गंगाखेड़कर से कहा, ‘कॉन्टैक्ट-ट्रेसिंग बहुत होनी चाहिए।’

केरल ही क्यों?
पुणे स्थित आईसीएमआर-एनआईवी द्वारा संचालित एक राष्ट्र सहयोगी सर्वेक्षक में 9 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में चमगादड़ों की आबादी में निपाह वायरस के प्रसार के प्रमाण मिले हैं।

14 जुलाई तक राज्य और दो केन्द्रशासित बेरोजगारों का सर्वेक्षण पूरा हो गया। इस दौरान केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोआ, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और केंद्रशासित प्रदेश पांडिचेरी में चमगादड़ों में निपाह विरल एंटीबॉडी की हिस्सेदारी पाई गई।

इसी अध्ययन में गंगाखेड़कर के हवाले से कहा गया है, ‘ऐसी संभावना है कि अन्य राज्यों में छोटे स्तर पर प्रकोप होगा, जो रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।’ ऐसे में हमें अपने पर्यवेक्षण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश के मॉडल को देखने की जरूरत है, जहां उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा और आम जन की जागरूकता के जरिए इस वायरस से लड़ने वाली लड़की है। वह कहते हैं, ‘कई अन्य चिकित्सकों के अलावा, उन्होंने चमगादड़ों के आकर्षण को रोकने के लिए ताड़ के पेड़ों को जड़ना शुरू कर दिया है।’

वयोवृद्ध वैज्ञानिकों के अनुसार, “केरल अद्वितीय है और इस तरह के प्रकोप से शुरू होने के लिए उसके पास अच्छा संस्थान है।” राज्य की स्वास्थ्य दवा भी स्वस्थ है, जहां आम आदमी द्वारा परामर्श और जागरूकता को बहुत कम लिया जाता है।

निपाह वायरस का इलाज क्या है?
भारत ने निपाह वायरस से अधिक मोनोक्लोनल अल्कोहल डोज़ प्राप्त करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया है। आईसीएमएसटी के प्रमुख डॉ. राजीव बहल के मुताबिक, भारत को जल्द ही अतिरिक्त 20 खुराक मिलने की उम्मीद है।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी – जिसने अपने पहले चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है और भारत के बाहर निपाह वायरस से 14 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को नष्ट कर दिया है और सभी बच गए हैं।

भारत ने पहली बार साल 2018 में यह क्रम दिया था। उन्होंने लिखा है, ‘हमने सबसे पहले इन मूर्तियों का ऑर्डर दिया था। हालाँकि, जब तक वे भारत में थे, तब तक प्रकोप समाप्त हो चुका था।’ ऐसे में भारतीय अधिकारियों द्वारा इन दवाओं का इस्तेमाल अब किया जा रहा है।

टैग: आईसीएमआर, केरल समाचार, निपाह वायरस



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