राजकुमार/महासमुंद. गणेश चतुर्थी की सामूहिक धूम धाम से चल रही हैं। वहीं मूर्तिकार भी गणेश भगवान की मूर्तियां बना रहे हैं, मूर्तिकार भी कलाकृतियाँ कलाकृतियाँ दिखा रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है माधवी साहू की, जो महासमुंद जिले के बागरा ब्लॉक में बिहाजर नामक गांव में रहते हैं, मॉडल शिक्षा माधव ने गांव में ही की, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए माधव ने खैरागढ़ विश्वविद्यालय से शहरी क्षेत्र में वापस पढ़ाई की और घर के पिछड़ेपन क्षेत्र में अपना खजाना दिखा रहे हैं।
मूर्तिकार माधवी ने बताया कि लगभग 25-26 वर्ष से उनके पिता मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं, अब वो भी अपने पिता जी से प्रभावित होकर मूर्ति निर्माण में उनकी सहायता कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि पिता जी को अपने जीवन का आधार बनाना है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश के साथ-साथ अन्य बेरोजगारों से भी मूर्ति बनाने के ऑर्डर मिल रहे हैं।
दूसरे लोगों को भी दे रहे रोजगार
वहीं मूर्तिकार माधवी ने बताया कि उनके परिवार की आजीविका का साधन क्या है, विपक्ष में वो अभी गणेश जी की सुंदर-सुंदर प्रतिमाएं बना रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ के अलावा भी शामिल हैं, माधव ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी 17 फीट की मूर्ति बनाई गई है। माधव ने बताया कि निजीकरण से इतना जुड़ाव हो जाता है, कि उन्हें दूसरे के यहां काम करने की जरूरत नहीं है। मैं खुद आत्मनिर्भर हूं, और अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
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पहले प्रकाशित : 18 सितंबर, 2023, 16:19 IST
