रामकुमार नायक/महासमुंद(रायपुर): छत्तीसगढ़ की राजधानी को स्मार्ट सिटी कहा जाता है, जब स्मार्ट सिटी का खुलासा होता है, तो लोगों को लगता होगा, कि यह शहर काफी हाईटेक होगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. छत्तीसगढ़ में शहरी, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के साथ-साथ आदिवासियों और सुदुर धरोहरों में भी सड़कें बनीं, लेकिन इन बाजारों में सार्वजनिक परिवहन की मांगें उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं। यही हाल स्मार्ट सिटी रायपुर का है। यानी स्मार्ट सिटी से आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र को जोड़ने का काम अधूरा ही हो गया है।
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं बढ़ाने की दरकार है। सार्वजनिक परिवहन का लाभ कहीं भी दिखाई नहीं देता है, लेकिन जनता को इसका ढांचा बाद में समझ आता है. प्रदेश में व्यक्तिगत वैवाहिक संख्या की तरह ही जनसंख्या का अनुपात भी कम है, लेकिन सिटी मार्केट का नक्शा सिर्फ रामपुर तक का है, जबकि प्रदेश के अन्य शहरों में अभी तक सिटी बिजनेस बिजनेस शुरू नहीं हो पाया है। बता दें कि सार्वजनिक परिवहनों को बेहतर बनाने के लिए सिटी प्लाजा का मूल्य बढ़ाना आपके लिए आवश्यक है।
एयरपोर्ट से रायपुर में आए 50 रुपए के व्यापारी
वर्तमान में एयरपोर्ट से एक या दो शहरों में ही पासपोर्ट होता है, यह नियमित रूप से संचालित नहीं होता है। सिटी टैक्सियों में यात्रियों को एयरपोर्ट से लेकर रायपुर आने में 50 रुपये का व्यापारी लगता है, जबकि निजी टैक्सियों में यह व्यापारी लगभग 500 से 600 रुपये का लगता है। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े हवाई अड्डे से सार्वजनिक परिवहन में लगातार खामियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। दिल्ली तक के हवाई जहाज़ में आने वाले खर्चे का अंदाजा दिल्ली से दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर जाने में लगता है।
17 छात्रावास आश्रम स्थिति में
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में शहरी उपभोक्ताओं की स्थिति बेहद खराब है। वर्तमान निगम के माध्यम से जा रही शहरी आबादी की संख्या लगभग 50 है, जिसमें 17 आबादी वाले छात्रावास स्थित हैं। नवा रायपुर में बीआरटीएस के अधीन कार्मिक संचालित हैं, लेकिन यह कार्मिकों के लिए शासकीय अधिकारी-कर्मचारी हैं। नवा रायपुर आने-जाने के लिए सामान्य नागरिकों के लिए भी सामान्य सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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पहले प्रकाशित : 11 सितंबर, 2023, 18:23 IST
