चंद्रयान-3 नवीनतम समाचार: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) चंद्रयान-3 के लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। इसरो का कहना है कि अभी तक उन्हें इस प्रयास में सफलता नहीं मिली है. न तो विक्रम से कोई ‘सिग्नल’ मिलता है और न ही ‘प्रज्ञान’ से। हालाँकि इसरो अभी भी अपनी कोशिशें जारी है। बता दें कि मून की सतह पर सफल लैंडिंग के बाद 4 सितंबर को लैंडर विक्रम और रोवर परिज्ञान को स्लीप मोड में डाल दिया गया था।
स्लीपिंग मॉड में क्यों डाला गया? चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) के लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ का मिशन 14 दिन का ही था। चंद्रमा पर 14 दिन तक का समय होता है और 14 दिन तक की रात होती है। लैंडर विक्रम जब वहाँ उतरा था, तब दिन का समय था। आपको बता दें कि विक्रम और प्रज्ञान दोनों, सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं। इसका मतलब यह है कि चंद्रमा पर जब दिन का वक्त होगा, एक और तीसरा उपग्रह बिजली मिल सिखाएगा।
चंद्रमा पर जब तक दिन का समय था, तब तक विक्रम और प्रज्ञान ने अपना काम किया। इसके बाद रात से पहले ही 4 सितंबर को स्लीपिंग मूड में डाल दिया गया।
-253 डिग्री से जगना आसान नहीं: इसरो के अनुसार चंद्रमा पर रात का तापमान -130 डिग्री तक गिर जाता है। कुछ ओरिएंटल में तो तापमान 253 डिग्री तक पहुँच जाता है। ऐसे में विक्रम और प्रज्ञान की बैट्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य तत्वों का इतना कड़ाके की ठंड झेलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन उन्होंने चंद्रमा पर रात के कठोर वातावरण को ध्यान में रखते हुए विक्रम और प्रज्ञान को आदर्श से तैयार किया है। इसलिए उम्मीद है कि आज के दिन के साथ ही वे फ्रेमवर्क काम करेंगे और भारत को कुछ और महत्वपूर्ण जानकारी मिलेंगी।
विक्रम और प्रज्ञान नहीं जगे तो क्या होगा? इसरो के मुताबिक स्लीपर मूड में पहले चंद्रयान-3 के रोवर प्रैगन की बैट्री फुल चार्ज की गई थी। लैंडर और रोवर, दोनों का रिसीवर भी ऑन है। संपर्क स्थापित करने की लगातार कोशिशें भी की जा रही हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो विक्रम और प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर भारत के राजदूत के तौर पर हमेशा मौजूद रहेंगे। दोनों ने अपना मिशन पहले ही कंप्लीट कर लिया है। कंपनी जगत हैं तो एक तरह से बढ़ावा की तरह होगा.
क्या विक्रम या प्रज्ञान से कोई डेटा चोरी हो सकता है? यदि विक्रम और पृथ्वी की सतह पर विक्रम और पुरातत्व नहीं जगे और चंद्रमा की सतह पर ऐसे ही पड़े रहे तो क्या किसी दूसरे देश के भविष्य की जानकारी में कोई चोरी हो सकती है? बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार आंध्र विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर पी. रिलायंस का कहना है कि अगर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान सेफ़िल्म संपर्क स्थापित नहीं हुआ तो बोमो मून पर एक तरह से जुगाड़ की तरह पड़े रहेंगे। किसी और के लिए इसका कोई मतलब नहीं है और इसके बाद कोई भी जानकारी हासिल नहीं की जा सकती है।
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पहले प्रकाशित : 23 सितंबर, 2023, 16:52 IST
