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छत्तीसगढ़ की इन गुफाओं में आदिमानवों द्वारा बनाई गई पेंटिंग-न्यूज18 हिंदी


सौरभ तिवारी/रायगढ़ः छत्तीसगढ़ राज्य की अपनी प्राकृतिक रासायनता और गहन इतिहास के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ में ऐसी कई जगहें हैं, जो अद्भुत हैं और आपके अंदर कई रहस्य और पुराने इतिहास जुड़े हुए हैं। बात करें राज्य की विभिन्न ऐतिहासिक गुफाओं की, जिनका अपना एक अलग ही खास इतिहास है। दोस्ती में से एक खास गुफा के बारे में आज हम आपको मनोवैज्ञानिक बताते हैं जहां कभी आदिमानव रह रहे थे। इन गुफाओं में आदिमानवों का घर रहता था, और उनके चित्र भी आज भी मौजूद हैं

असली रायगढ़ जिला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व ओडिशा तक सरहद से लगा हुआ है। इसका उत्तरी क्षेत्र बिहड़, जंगल, विश्वास से भरा हुआ है. इसके अलावा इसका दक्षिण भाग थेठ मैदानी है। आदिमानव आज की तरह घर नहीं बना सकते थे। इसलिए वह समुद्र की मार और जंगली चट्टानों से बचने के लिए प्राकृतिक रूप से बनी गुफाओं में ही शरण लेते थे और आराम में रहते थे। इन गुफाओं को शैलाश्रय या फिर चट्टानों के घर कहा जाता है।

आदिमानव चित्रकारी करते थे
उस समय आदिमानव ने जो भी देखा वह अपनी चित्रकारी गुफाओं में बना दिया था। जिसमें रॉक पेंटिंग (शैल चित्र) कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में भी आदिमानवों का निवास स्थान हुआ था। कबरा पर्वत के शैलाश्रय समुद्रतटीय स्थल हैं। यह गुफाएँ रायगढ़ से 18 कि.मी. दूर विश्वनाथपाली और भद्रपाली गांव के पास पहाड़ी में स्थित है। उस समय यह पर्वतीय घुटने टेकना, वृक्षों से घिरा हुआ, दुर्गम स्थल हुआ था। काला शैलाश्रय के चित्र भी गहरे लाल, गेरू रंग में अंकित हैं। इसमें कछुआ, घोड़े और हिरणों की छतें बनी हुई हैं। बफ़ेलो गुफाओं में वन्यजीव बफ़ेलो का भी एक मूर्तिकला चित्र है। इस बात के साक्ष्य मिलते हैं कि यह जानवर उस समय वहां पर और भी पाए गए थे। हालाँकि यहाँ गुफाओं तक पहुँचने के लिए आपको कुछ दूर की ट्रैकिंग करनी होगी और यहाँ तक पहुँचने का रास्ता भी आसान नहीं है। इसलिए यहां जब भी पूरी तैयारी के साथ जाएं.

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