उत्तर
सबसे पहले चीन में पैदा हुई चीनी की सब्जी।
इस सब्जी को जड़ी-बूटी परिवार का माना जाता है, गोभी परिवार से कोई संबंध नहीं।
चीनी गोभी के फायदे और इतिहास: आज हम आपको एक विदेशी (विदेशी) वनस्पति पौधे के फूल के बारे में बताने जा रहे हैं। नाम के अनुसार यह लगी सब्जी सबसे पहले चीन में पैदा हुई और उसके बाद भारत समेत पूरी दुनिया में ओबै गई। सेहत को लेकर ये सब्जी बेहद गुणकारी है. यह हड्डियों (हड्डियों) को मजबूत बनाने में बेहद मददगार है, साथ ही दिल को मजबूती से दूर रखने में भी योगदान देता है। इस सब्जी में विटामिन्स और फ़्लोरिडा की भरमार है, इसलिए इसका स्वाद अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। भारत में भी ये सब्जी आसानी से मिलने लगी है.
पालक से अधिक है गुणकारी
डोभाल पत्तागोला (बोक चॉय) अब मूल्यांकित (कीमती) डोकलाम की सूची से बाहर है। इसका कारण यह है कि वनस्पति विज्ञान में इस सब्जी के गुणों को पहचाना जा रहा है, जिसके बाद यह कई देशों में आसानी से उगाई जा रही है। यह सब्जी इसलिए विशेष है कि इसमें पालक से अधिक विटामिन सी और एक पाया जाता है। अगर पत्तेदार पत्ते से तुलना करें तो इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है। कच्चे खाने में यह पत्ता गोभी से अधिक स्वादिष्ट, कुकुरी व मिठाई होती है और पकाए जाने पर यह अधिक स्वादिष्ट होती है। इसे कच्चा तो आसानी से बनाया जा सकता है, कॉन्टिनेंटल व इंडस्कुलर डिशेज में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसे स्टीम्ड, ग्रिल और स्टॉकर भी आसानी से खाया जा सकता है। सब्जियों के साथ विशेष व्यंजन बनाए जा सकते हैं। कोरिया, चीन, जापान जैसे देशों के प्रसिद्ध आहार किमची (किम्ची) व्यंजनों में तो स्वाद ही खाद्य पदार्थ पत्तो गोल्डन से भरा हुआ है। किमची एक तरह से अचारनुमा कीक है, जो डिश हर के साथ खाई जाती है।
बैलगाड़ी का पत्तागोला (बोक चॉय) अब मूल्यवान स्टॉक की सूची से बाहर आ गया है। छवि: कैनवा
चीन में पैदा हुई और दुनिया में तस्वीरें
इससे तो स्पष्ट है कि चीनी पत्तागोभी की उत्पत्ति चीन में ही हुई है। खाद्य इतिहासकारों का मानना है कि बोकॉय की खेती हजारों साल पूर्व चीन की यांग्त्ज़ी नदी डेल्टा में शुरू हुई थी। यह 14वीं सदी में कोरिया प्रायद्वीप से व्यापार क्रांति में शामिल हुआ, जहां यह किमची एक प्रमुख घटक बन गया। इसे 16वीं सदी में दक्षिण पूर्व एशिया और 19वीं सदी में चीनी साम्राज्य के माध्यम से यूरोप और उत्तरी अमेरिका में लाया गया। आजकल यह ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, यूरोप, कनाडा, अमेरिका, कैरेबियन में आसानी से ऑनलाइन और इंस्टिट्यूट जा रही है। विशेष रूप से यह है कि इस सब्जी को सरसों परिवार का माना जाता है और गोभी की बात का इससे कोई संबंध नहीं है। भारत में समुद्र के मौसम में इसकी खेती की जाती है। समशीतोष्ण कृषि इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त है।
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हड्डियों के लिए बेहद खास है यह बकरी
भारतीय कृषि विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. बिश्व चौधरीजीत उन्होंने अपनी किताब ‘वेजिटेबल्स’ में यह जानकारी दी है कि चीनी गोभी का नाम सी ही बताया जाता है कि यह चीन में पैदा हुई है। अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी गोभी का उत्पादन केवल मध्यम से ठंडा तापमान (15° से 20°C) में ही किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसकी सभी सांस्कृतिक क्रियाएं गोभी के समान हैं, इसलिए इसे भारत में भी आसानी से विकसित किया जा रहा है। इस बकरी को शरीर के लिए बेहद व गुणकारी माना जाता है। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) का मानना है कि इस समूह के पत्तों में विटामिन के, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, पिरामिड और फास्फोरस के तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं, जो खंडों को मजबूत बनाते हैं, भागों की संरचना को बनाए रखते हैं और टुकड़ों को बनाते हैं। रोकथाम में मदद करते हैं. एक सर्च में यह भी बताया गया है कि इसमें मौजूद विटामिन के न केवल खनिज लवणों की भरपाई की जा सकती है, बल्कि अवशेषों के अवशेषों को भी कम किया जा सकता है।
अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी गोभी का उत्पादन केवल मध्यम से ठंडा तापमान (15° से 20°C) में ही किया जा सकता है। छवि: कैनवा
दिल और बीपी में भी
इस बक्से में चमत्कारिक रूप से दिल को मजबूत करने वाले अवशेष के भी गुण मौजूद हैं। इसका सेवन धमनियों को नुकसान के नमूने वाले को ऊंचा उठाने का मौका देता है, जिससे ब्लड का सर्कुलेशन का अध्ययन रहता है। यह भी पाया जाता है कि कंकाल और नर्वस सिस्टम को मेमोरी, मैट्रिक्स, पोषक तत्वों पर नियंत्रण और अन्य पोषक तत्वों को शामिल किया जाता है। है. यह तत्व शरीर की सूजन से भी बचाता है और शरीर को सामान्य स्थिति से बचाने में मदद करता है। इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लड उपकरण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
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पहले प्रकाशित : 24 सितंबर, 2023, 07:00 IST
