अनूप/कोरबाः हिन्दू धर्म में हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पर्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। इस दिन देवशिल्पी भगवान कारीगर की पूजा की जाती है। भगवान मुकुलकर्मा को सृष्टि का पहला इंजीनियर कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवशिल्पी भगवान विष्णु ने पूरी सृष्टि का निर्माण कराया है। भगवान वास्तुशिल्पियों ने ही देवताओं के अस्त्र और शस्त्रों का निर्माण किया था। आपको बता दें, कि इस साल की मूर्तिकला पूजा 17 सितम्बर 2023, रविवार को की जाएगी.
इस दिन होगी विश्राम की पूजा
हिंदू धर्म में सभी पूजापाठ और शुभ कार्य विशेष में बताए गए हैं। वास्तुविद्या को ले कर भी हमने ज्योतिषाचार्य से बातचीत की। पंडित अंबेडकर डौमे ने बताया कि पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 17 सितम्बर 2023 को मनाएगा. देवशिल्पी भगवान विष्णु की पूजा का दौर तो दिन भर का है लेकिन पूजा के लिए शुभ उत्सव है 17 सितम्बर की सुबह 10 अन्य 15 मिनट से लेकर दो मिनट 12 अन्य 26 मिनट तक रहेगा.
संस्था-औजारों की होती है पूजा
इस दिन लोग भगवान विष्णु की कृपा से वाहन प्राप्त करें, क़लम, कलपुर्जों और प्रतिमाओं की साफ-सफाई की जाती है और फिर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन का काम, औज़ारों को आराम दिया जाता है और उनका काम नहीं लिया जाता.
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पहले प्रकाशित : 11 सितंबर, 2023, 17:24 IST
