पूर्णिया. बिहार के पूर्णिया जिले के कुलपति सिद्धार्थ कुमार शिक्षक की भूमिका पर नजर पड़ी। बेतिया के चनपटिया को थ्रिलर जोन बनाने के बाद अब स्टूडियो स्टूडियो में काम कर चुके हैं। इसके लिए शिक्षकों ने समाहरणालय में करीब 120 युवतियों से संवाद किया। उन्हें विसर्जन प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी गई। टीचर्स के इस क्लास से भी काफी खुश और उत्सुक नजरें आईं।
एक्टर जॉन चनपटिया ने प्राइम से अवॉर्ड पा 2019 के दशक में स्टूडियो एक्टर के तौर पर वापसी की और फिल्म के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने रुडकी से लेकर असम तक के विशेषज्ञों को पूर्णिया के युवा युवतियों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। इसके अलावा कई बड़ी कंपनियों की मदद से यहां के प्लाटों को ट्रेनिंग के साथ डिजाइन और प्रोडक्शन की शुरुआत भी की जा चुकी है।
सती को समाहरणालय में छात्रों को डूबती तकनीक और आर्किटेक्चर के साथ वास्तुशिल्प को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इस दौरान टीचर ने गर्ल-गर्ल्स से कर उन्हें सूर्योदय की ट्रेनिंग भी दी। न्यूज़ 18 से खास बात करते हुए कहते हैं कि सरकार के स्टूडियो को लेकर कई फिल्में चल रही हैं। इसके तहत वे अत्याधुनिक तकनीक बनाई जा रही हैं, जिसमें यहां के युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक, फ़्लोरिडा, तकनीक से लेकर कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है।
इसके लिए यूथकनेक्टेड के साथ-साथ कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ताकि ये युवा आत्मनिर्भर बनें। इसमें कई ऐसी युवा युवतियां हैं जो खुद का फिल्मांकन करना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्णिया के जिला स्कूल में जल्द ही छुट्टी का खुलासा किया जाएगा, जहां कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ‘फिल्म के माध्यम से युवा न सिर्फ आत्मनिर्भर बल्कि जब क्रिएटर भी होगा।
वहीं शिक्षक की भूमिका में शिक्षक की कक्षा से छात्र-छात्रा भी काफी उत्साहित थे। छात्रों ने कहा कि अंकल अंकल ने उन लोगों को एक शिक्षक की तरह सिखाया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कैसे किया जाए, वह सिखाना शुरू कर सकते हैं। छात्र हर्ष राज, श्री लक्ष्मी और मुस्कान परवीन ने कहा कि उन्हें स्टूडेंट एस्कॉल के विशेषज्ञ द्वारा सहायता से प्रशिक्षण दिया गया था। सूर्योदय के कृषि से लेकर अन्य क्षेत्रों में कैसे उपयोग करें इस द्वीप के लोगों ने काफी कुछ सीख दी है। आगे अपने जीवन में उभरेंगे। कई ने तो इस क्षेत्र में फिल्मांकन शुरू करने की भी बात कही. इस दौरान सभी विद्यार्थियों को इलेक्ट्रोडायर्ड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट लेटर भी दिया गया।
पूर्णिया के ऑर्केस्ट्रा स्टूडियो में इस अनोखी पहल ने छात्रों के लिए एक नया उत्साह भरा है। एक तरफ जहां बिहार के लोग और यहां के युवा नौकरी के लिए दूसरे बेरोजगारों में जा रहे हैं. अगर डीम की ये पहला रंग होता तो वह दिन-दूर नहीं जब तक कि फिल्म का पूरा रंग शुरू नहीं हो जाता, यहां के युवा भी जब क्रिएटर बने।
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पहले प्रकाशित : 24 सितंबर, 2023, 13:56 IST
