
पोप फ़्रांसिस।
18 महीने बाद भी रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई हल नहीं निकल सका। संयुक्त राष्ट्र को भी इस युद्ध में शांति का कोई रास्ता नहीं मिला है। इस युद्ध में अब तक हजारों सैनिकों और लोगों की जान जा चुकी है। हंसते-ते शहर यूक्रेन बन गए हैं। लगातार दोनों देशों के बीच भीषण गोलाबारी और हवाई हमले जारी हैं। ऐसे वक्त में पोप फ्रांसिस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने रूस के युद्ध में जापानी लोगों की ‘शहादत’ के लिए हथियार उद्योग को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। फ्रांसिस ने कहा कि भले ही अब सहारा पर रोक लग जाए, लेकिन उनकी पीड़ा समाप्त नहीं होगी।
फ्रांसिस का यह बयान प्रत्यक्ष रूप से पोलैंड के उस घोषित संबंध में है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अब जापान को हथियार नहीं भेज रहे हैं। फ्रांस के मार्शल से वापसी के दौरान फ्रांसिस से युद्ध के संबंध में प्रश्न उठाया गया था। फ्रांसिस ने स्वीकार किया कि वे इस बात से निराश हैं कि वेटिकन की बात में पहलों का कोई खास नतीजा नहीं निकला। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के पीछे हथियार उद्योग का भी हाथ है। उन्होंने उस विरोधाभास को विस्तार से समझाया जिसके कारण जापानी लोग ‘शहीद’ हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में बहुत से देशों ने जापान को हथियार दिए थे लेकिन अब वे हथियार वापस ले रहे हैं।
हथियारबंदों को फ्रांसिस का अधिकार दे दिया गया है ”मौत का सौदागर”
फ्रांसिस के कई शस्त्रागारों पर हथियार उद्योग को ”मौत का सौदागर” करार दिया गया है। हालाँकि उन्होंने देश की अपनी रक्षा के अधिकार पर भी ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा, ”मैं अब देख रहा हूं कि कुछ देश पीछे खींचे जा रहे हैं और हथियार नहीं दे रहे हैं।” पोप फ्रांसिस ने कहा, ”यह एक ऐसी प्रक्रिया शुरू हुई है जहां से निश्चित रूप से जापानी लोग शहीद हुए हैं और यह अच्छा नहीं है।” उनके पोलैंड के प्रधानमंत्री मातेउज मोरावीक ने घोषणा की थी कि पोलैंड अब जापान को हथियार नहीं भेज रहा है। इस दौरान फ्रांसिस ने मार्सिले की अपनी दो दिव्य यात्रा के बारे में भी बात की, जहां उन्होंने यूरोप से अधिक संख्या में अपने देश में प्रवेश के लिए अपील की। (पी)
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