उत्तर
इंजेक्शन के दौरान ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जांच बेहद जरूरी है।
टॉयलेट के दौरान रेनबो घटक लेने से गर्भाधान में रखा जाता है।
गर्भावस्था के दौरान सामान्य परीक्षण: वर्गीकरण के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, डॉक्युमेंट्री मॉनिटरिंग करना बहुत जरूरी है। दस्तावेज़ से पहले सभी गर्भवती महिलाओं को आवश्यक परीक्षण और उपकरण करवा लेनी चाहिए, ताकि गंभीर स्थिति से बचा जा सके। प्रसव से पहले सही जांच और अच्छी अंतर्वस्तु वाली महिलाओं में पोस्ट-पार्टम हेमरेज जैसी गंभीर स्थिति को रोका जा सकता है। भारत में बड़ी संख्या में महिलाएँ पीड़ित से पीड़ित हैं। यह समस्या कई बार गर्भवती महिलाओं को जान का खतरा बन जाती है। ऐसे में सही जांच और इलाज अत्यंत आवश्यक है। आज डॉक्टरों से जानेंगे कि क्लच के दौरान महिलाओं को कौन से जरूरी टेस्ट करवाएं और कैसी लेंगी लेनी चाहिए।
सूची में चेकअप पैकेज किससे मिलना चाहिए?
ग्रेटर एवं फोर्टिस हॉस्पिटल के प्रसूति स्त्री रोग विभाग के हॉस्पिटल डॉ. सोनाली गुप्ता के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के लिए सबसे अहम टेस्ट मांगे जाते हैं। ब्लड टेस्ट में कंप्लीट ब्लड काउंट और वायरल लक्षण शामिल होते हैं, जिसमें ब्रेस्ट बी, स्टडी सी, अंडहीन और मरीज़ की जांच की जाती है। इसके अलावा पूरी तरह से चुनौती के दौरान कम से कम दो बार महिलाओं को ग्लूकोज की चुनौती से जूझना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को 2 घंटे बाद 75 ग्राम ग्लूकोज़ चढ़ाकर रक्त का आसंजन दिया जाता है। यह महिला परीक्षण में काम करता है या नहीं, यह निर्धारित करने में सहायक होता है। ब्लड और शुगर टेस्ट के अल्ट्रासाउंड बहुत जरूरी होता है। इसमें मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। आम तौर पर पूरी तरह से वर्गीकरण के दौरान किसी भी प्रकार के लेवल 1, लेवल 2 और लेवल 3 के माध्यम से तीन बार अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
कब-कब करवाएं अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट?
डॉ. सोनाली गुप्ता का कहना है कि पहले चरण का अल्ट्रासाउंड 11 से 13 ग्रेड की रैली होती है, जिसमें बच्चों की बिक्री का पता चलता है। इस दौरान डॉक्टर बच्चे की ग्रोथ, प्लेसेंटा की सुई और एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा की जांच करते हैं। लेवल 2 का अल्ट्रासाउंड 19 से 20 के बीच होता है। दूसरे चरण के अल्ट्रासाउंड में बच्चे की समग्रता में कोई कॉम्प्लीकेशन है या नहीं, इसका पता लगाया जाता है। लेवल 3 का अल्ट्रासाउंड 32 सप्ताह के आसपास होता है। तीसरे चरण के अल्ट्रासाउंड के समय तक बच्चे के सभी मरीज़ बन जाते हैं और डॉक्टर परीक्षण के दौरान एनाटोमिक मरीज़ की किसी भी तरह की आकृति की जाँच की जाती है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट डॉक्टर पेशेंट की कंडीशन के अकाउंट से समय-समय पर किया जाता है।
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इंजेक्शन के दौरान रेनबो को शामिल करना आवश्यक है
ग्रेटर एवं फोर्टिस अस्पताल के प्रसूति स्त्री रोग विभाग की प्रयोगशाला डॉ. राखी गुप्ता गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को जोखिम से बचने के लिए डॉक्टर रेनबो इंजेक्शन की सलाह देते हैं। इस घटक में हर रंग का खाना शामिल होता है और इसे दीर्घकालिक आहार माना जाता है। चना, गुड़, सागा, साबूदाना और विभिन्न प्रकार के फल महिलाओं के पोषण को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान सही पदार्थ न लेने से मां और बच्चे दोनों को नुकसान हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को सर्जरी से पहले सभी तरह की जांच करवा लेनी चाहिए, ताकि गर्भवती महिलाओं को सर्जरी का पता चल सके और उनका सही समय पर इलाज किया जा सके।
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पहले प्रकाशित : 25 सितंबर, 2023, 15:38 IST
