Homeमनोरंजनप्रतिष्ठानों के लिए पढ़ाई-लिखाई और जगहें ही नहीं, घरेलू काम भी जरूरी,...

प्रतिष्ठानों के लिए पढ़ाई-लिखाई और जगहें ही नहीं, घरेलू काम भी जरूरी, पर्सनैलिटी में आता है गजब का निखार, जानें 5 फायदे


उत्तर

कार्य करने वाले प्रतिभागियों में एटमसमान और एटमसमेन्शन की संख्या बहुत अधिक है।
उन्हें लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया गया है और वे प्रबंधन सीख रहे हैं।

घरेलू कार्य और बाल चरित्र विकास: हम घर के छोटे-छोटे बच्चों से काम काज वंचित हैं और उनका मानना ​​है कि जब ये बड़े हो जाएंगे तो आप ही काम सीख जाएंगे। लेकिन हां, आप जानते हैं कि अगर आप छोटी उम्र से ही अपने साथ घरेलू काम-काज में शामिल हो जाते हैं, तो यह न केवल उनके मनोरंजन के लिए पर्याप्त है, बल्कि उनकी सुंदरता को निखारने में भी काफी मदद करता है।

शोध में क्या बात सामने आई?

साइकोलॉजी पत्रिका के अनुसार, घर का काम करने वाले छात्रों में एटमसममैन की संख्या बढ़ जाती है और इसकी मदद से बड़ी आसानी से उन्हें आरामदेह स्थिति में रखा जा सकता है। यह हर्ट्ज़ निजीकरण जीवनभर काम आता है और वे हर उम्र में एटमविश्लेषणवास से परिपूर्ण रहते हैं। यही नहीं, वे लैंगिक समानता को बढ़ावा देते हैं और वे घर का प्रबंधन और अपनी भागीदारी सीखते हैं।

घरेलू काम सिखाने के फायदे

टीम वर्कशॉप- जब कम उम्र से ही माता-पिता के काम में हाथ बटाना सीख लिया जाता है तो उनके अंदर यह समझ पैदा हो जाती है कि टीम वर्क में चीजें जुड़ी होती हैं और इसे किस तरह मिलजुलकर करना चाहिए।

बड़ा है एटमविश्लेषण- असल में जब दोस्ते अपना ब्रेकफाफा मानक खुद तैयार करने के लिए निकले हैं या अपने कमरे की क्लासिकल खुद करने गए हैं तो उनके अंदर एक मसाला पैदा हो गया है कि उनके लिए कोई भी काम सीखना या करना मुश्किल नहीं है। इस तरह उनके अंदर खुद के प्रतिरूप जगने लगते हैं।

अभ्यावेदन की समझ- काम के लिए किसी उम्र में जेंडर की जरूरत नहीं होती, यह बात साथियों को जल्दी जल्दी समझ आ जाए, अच्छा होता है। इस तरह उनकी अंदरूनी समझ यह पैदा होती है कि घर का हर काम मिलजुल कर करना चाहिए। इस तरह उनके अंदर जेंडर इलैलिटी की समझ बचपन से पैदा होती है।

इसे भी पढ़ें: पिता की 5 आदतें, जो संतानें बनती हैं देखभाल करने वाले बच्चे, घर ही नहीं, बाहरी लोग भी करते हैं मदद, बनते हैं अच्छे इंसान

विश्विद्यालय की समझ- लाइफ़ स्किन यानी कि ज़रूरत पर खुद की साख को पूरा करने का बजट। जी हाँ, हो सकता है कि छोटी-छोटी साज-सज्जा के साथ काम करना आपके लिए मुश्किल हो, हो सकता है कि वे रसोई बनाते हों, लेकिन सच मानिए, तीन एज में जाएंगे वे इतनी तैयार हो जाएंगे कि वे अपना ही नहीं, परिवार के मित्र मंडलियों की देखभाल भी खुद कर फ़ायदेमंद।

इसे भी पढ़ें: पढ़ना नहीं चाहता आपका सामान, अपनाएं 5 टिप्पणियाँ, आलोचना से अंतिम मूल्य, बार-बार याद नहीं लाना पड़ेगा आपको

जिम मदर्सियों की समझ- इंस्टालियों में जब होटल डेवेलप होने लगे तो उनके अंदर के प्रति जिम मॅटेरियंस भी पैदा होने लगे। मसलन, स्कूल से ज्ञान जूतों को पहले ही जाना, थकान के बावजूद अपने लिए नशा तैयार कर लिया, घर की सुरक्षा का खुलासा आदि। इसलिए प्रयास करें कि प्रतिभाएं कम उम्र से ही अपने साथ घर के काम में शामिल हो जाएं और अपने शास्त्रीय सिद्धांतों को निखारने के लिए नामांकन अवसर प्राप्त करें।

टैग: जीवन शैली, पेरेंटिंग, पालन-पोषण संबंधी युक्तियाँ



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img