नई दिल्ली. खालिस्तानी तीरंदाज ने कनाडा में शरण और नौकरी के नाम पर कनाडा सरकार के कुछ अधिकारियों के भाषण से लेकर स्ट्रॉन्ग सेल के साइंटिस्ट सरदार का नाम लिया। खालिस्तानी तीरंदाजों के इस काम में भारत की एक खालिस्तानी समर्थक पार्टी की भी अहम भूमिका है, जो कनाडा में राजनीतिक शरण फाउंडेशन के लिए युवाओं को अपना नामांकन पत्र देने के बदले 1 से 2 लाख रुपये की फीस देती है।
भारतीय युवाओं की विदेश यात्रा में बसने की चाह में खालिस्तानी मछुआरों ने हंगामा मचा दिया। उन्होंने इसके लिए एक साजिश के तहत अपना एक काकस तैयार किया जिसमें भारत की एक कथित राजनीतिक पार्टी से लेकर कनाडा के कई अधिकारी भी शामिल थे। कनाडा के चमत्कारी जहाज़ ले जाने वालों को पता है कि ये जहाज़ के चमत्कारी लोग आसान नहीं हैं। लेकिन खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर, मोनिंदर सिंह, भगत सिंह बराड़, पर खालिस्तानी समर्थक एजेंट को आगे बढ़ाने के लिए कनाडा में नौकरी और शरण के नाम पर भोले भाले सिख युवाओं का जबरदस्त इस्तेमाल किया गया। इस षड्यंत्र के तहत पहले वे उन लोगों की खोज करते थे जो विदेश जाना चाहते थे, लेकिन उनके पास ना तो स्वामी के पास थे और ना ही किराए पर थे। इसके अलावा ऐसे अपराध जो अपराध करने के बाद यहां से बाहर बलात्कार करना चाहते थे।
पंजाब के गैंग्स का हुआ इस्तेमाल
इसी योजना के तहत इन लोगों ने पंजाब में दे अज़ीम बंबीहा गैंग, अर्श डाला, लखबीर लांडा जैसे जहरों का भी इस्तेमाल किया। दिलचस्प बात यह है कि इस काम में भारत की एक खालिस्तान समर्थक पार्टी ने भी अपना ज़ोर दिया, साथ ही फ़ायदा भी उठाया। खालिस्तान समर्थक इस पार्टी के युवाओं को यहां से कैनेडियन डिपो के लिए अपना सिफ़ारसी लेटर लेवी के बदले एक से दो लाख रुपये तक की फ़ीस वसूली रही थी। इस पत्र में इस बैलेट में दावा किया गया था कि वह उनकी पार्टी के सदस्य हैं और उन्हें भारत में धार्मिक आधार पर सताया जा रहा है। उनके डॉकी पत्र के आधार पर कनाडा में मौजूद अपराधी अपराधी गठजोड़ अपने साथ मिले कनाडा के कुछ अधिकारियों की मदद से सेलस्पेक्टिव मास्टर को दिलवा रहा था।
खालिस्तानी शेख ने भोले भाले लोगों का फ़ायदा उठाया
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि खालिस्तानी सेना को कनाडा में थाखालिस्तानी सेना की तरह माना जाता है, ऐसे लोगों की बेहद कमी है जो उनके द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शनों या पैदल सेना के सैनिकों की तरह शामिल हैं। कनाडा में काम करने वाले लोगों की मांग और आपूर्ति में अंतर का लाभ गैन्जा ने पंजाब के भोले भाले सिखाए गए युवाओं को प्लंबर, ट्रक ड्राइवर जैसे अर्धकुशल लायन में सेवादारों और गुरुद्वारों में धार्मिक गतिविधियों के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम क्रम दिया। अपने संकल्प के तहत उन्होंने कनाडा में पढ़ रहे भारतीय युवाओं की भी पहचान की खातिर वहां अपना गुजरात करना मुश्किल हो रहा था और उन्हें विविध सहायता या अन्य सहायता की आवश्यकता पड़ रही थी। कनाडा में अवैध प्रवासी और वे छात्र जो अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं लेकिन उपयुक्त नौकरी नहीं लेते हैं, वे सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इसी का लाभ पैकेज इन लोगों को गुरुद्वारों ने आदि में निम्न स्तर की राशि दी।
ब्रैम्पटन, एडमॉन्टन और समुद्र तट पर 30 से अधिक गुरुद्वारे हैं
इन खालिस्तान में कनाडा के ब्राम्पटन, एडमॉन्टन और सारे जैसे समुद्र तट में 30 से अधिक गुरुद्वारे निकलते हैं। खुफिया दस्तावेजों के मुताबिक जब इन युवाओं को वहां नौकरी की पेशकश की जाती है तो वे अपनी ब्रिगेड में रिश्वत या अनिच्छा से शामिल हो जाते हैं। जब आई एसोसिएट्स खालिस्तान ग्रुप सिख फॉर जस्टिस लाइक रिलिजन्स को पंजाब इंडिपेंडेंस रेफरेंडम के समर्थन के लिए समर्थन प्राप्त करना मुश्किल हो रहा था तो इन पैदल सेना का इस्तेमाल किया गया ताकि उनका अभियान सफल हो सके। भारत से कनाडा जाने वाला कोई वास्तविक यात्री ही नहीं जानता है कि वहां का वजीर प्राप्त करना बेहद कठिन और समय लेने वाला है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि खालिस्तानी हमलावर और अपराधी गठजोड़ को यह कहना बेहद आसान लगता है। क्योंकि यह पूरा स्टॉक कनाडा प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है।
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पहले प्रकाशित : 26 सितंबर, 2023, 17:20 IST
