नई दिल्ली. असलियत में मारे गए बोलेरो जिया उल हक की हत्या मामले में कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह नीयन राजा भैया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनकी भूमिका की जांच पड़ताल. इस संबंध में म्युज़िक कोर्ट के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सही ठहराया है। इस मामले में हाई स्कूल हक की पटनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
2013 में लोहिया हक की हत्या कर दी गई थी और पिछले साल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में मराठा कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
कैदी अदालत ने दस्तावेज़ को जांच जारी रखने का आदेश दिया था
गैंगस्टर कोर्ट ने राजा भैया और उनके 4 साथियों के खिलाफ़ की आरसी फोटोग्राफर की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और कॉनकॉर्ड की जांच जारी रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला ग़ैर की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को ख़ारिज कर दिया।
पुलिस को समग्र हुई थी याचिका, वैज्ञानिक जांच
ईसा की पत्नी परवीन आज़ाद ने पुलिस को दी अपनी याचिका में तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे राजा भैया, कुंडा नगर पंचायत के तत्कालिक अधोद्यक्ष गुलशन यादव और राजा भैया के सहयोगी हरिओम श्रीवास्तव, रोहित सिंह और साजिद सिंह ने नाम लिए थे।
2 मार्च 2013 को ड्यूटी के दौरान हुई थी हत्या
कुंडा के बल्लीपुर गांव के प्रधान नन्हें यादव पर हमला हो गया, जिसमें वे घायल हो गए। सूचना मीट पर बायोलॉजिकल जिया उल हक गांव क्षेत्र थे और किसान नन्हें यादव को अकोस्टल की सुविधा थी। हालाँकि यादव की मृत्यु हो गयी; उसे बिज़नेस नहीं जा सका. जब उनके शव को लेकर वोटिंग हक गांव एशिया तो भारी बारिश हुई और लोगों ने हक पर हमला कर दिया था। इसी बीच राजा भैया के बारे में कथित तौर पर ब्लास्टर ब्लास्टर ने पिज्जा को गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई।
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पहले प्रकाशित : 26 सितंबर, 2023, 23:04 IST
