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मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में भारत और चीन क्या बहुत मायने रखते हैं


उत्तर

व्यापार की हिंद महासागर में बहुत खास भूरणनीतिगत स्थिति है।
इसके आसपास के क्षेत्र भारत और चीन दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में दोनों देश अपने समर्थित व्यापारी का नया राष्ट्रपति चाहते हैं।

हिंद महासागर में भारत के लक्ष्यद्वीपों से नीचे 1200 द्वीपों का देश है। वैसे तो आकार में यह दक्षिण एशिया का बहुत छोटा देश है, लेकिन हिंद महासागर में इसका बहुत अधिक महत्व है। पिछले कुछ वर्षों से चीन ने हिंद महासागर में अपनी हिस्सेदारी बनाई है और भारत में अपनी प्रतिक्रिया दी है, यहां तक ​​कि अमेरिका के साथ मिलकर मिल उत्पाद समूह ने भी यहां काम किया है, बाजार का अंतरराष्ट्रीय महत्व काफी बढ़ गया है। 30 सितंबर को राष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है और जहां प्रतिस्पर्धा करने वाला प्रतियोगी भारत या चीन में से सबसे ज्यादा तरजीह देता है वह यह बहुत ज्यादा मायने रखता है।

दो प्यारे के बीच मुकाबला
शनिवार को वर्तमान नामांकन में वाले चुनाव में प्रतिस्पर्धा राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मोहम्मद मुइजू के बीच है। जिस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थितियां हैं उसे देखते हुए भारत और चीन दोनों का ही प्रयास है कि उनके संबंध बेहतर हों। जहां दोनों को चीन की ओर से रखा जाना तय माना जा रहा है।

एक भारत और एक चीन की ओर
इसका एक बड़ा कारण यह है कि बिकाऊ दुनिया के मालवाहक खिलाड़ियों के हिंद महासागर के रास्ते के बीच में अतिक्रमण वाला देश है। ऐसे में भारत और चीन की इस देश के चुनाव में सबसे ज्यादा मछली देखने को मिल रही है। डेमोक्रेटिक डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार सोलिह 2018 में विजयी रहे थे, के भारत से अच्छे संबंध माने जाते हैं, जबकि प्रोग्रेसिव अलायंस के उम्मीदवार म्युजू के चीन से बेहतर संबंध हैं।

भारत और चीन
वडोदरा का भारत के साथ पूर्णसंबंधों का पुराना इतिहास बना हुआ है। वह लंबे समय से भारत से प्रभावित हैं। वहां भारत की उपस्थिति हिंद महासागर में हमें पर्यवेक्षक की एक अतिरिक्त क्षमता प्रदान करती है। लेकिन चीन ने हिंद महासागर में अपनी नौसैन्य उपस्थिति दर्ज की है और वह यहां प्रमुख क्षेत्रों में अपनी पहुंच हासिल करना चाहती है, जिसमें उद्यमों के आसपास के क्षेत्र शामिल होना महत्वपूर्ण है।

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ऑर्केस्ट्रा के साथ अच्छे संबंध भारत और चीन दोनों के ऑर्केस्ट्रा में शामिल हैं। (प्रतीकात्मक चित्र: Pixabay)

चीन का काफी कुछ दावा?
हाल ही में चीन के खाड़ी देशों से खुले स्थानों के कारण उसके मालवाहक सहयोगियों के देश में आक्रमण हिंद महासागर से होने वाले चीन के लिए व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय उद्यमों को शामिल किया गया है जिसमें चीन को निजीकरण के रूप में शामिल किया जाना है। इसी तरह का प्रयास उन्होंने श्रीलंका को आर्थिक मदद देने के लिए किया था। चीन ने करोड़ों डॉलर का कर्ज चुकाया है। ऐसे में इस चुनाव में चीन का काफी कुछ दावा लगा है।

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भारत का पक्ष क्या है?
इसी महीने केशुरू में इस चुनाव के पहले चरण में सोलिह को सिर्फ 39 फीसदी वोट मिले थे. हाल ही में सोलिह को सबसे पहले भारत की नीति की आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसमें कहा गया था कि सोलिह ने चीन की कीमत पर भारत से रिश्ते मजबूत किये हैं। लेकिन बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार सोलिह ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने एक देश के संबंध में दूसरे की कीमत पर कभी ध्यान नहीं दिया और न ही इस तरह की नजर रखी।

भारत के खिलाफ?
भारत के 2013 में दिए गए दो हेलीकॉप्टर और 2020 में एक छोटा विमान दिया गया था। भारत का कहना था कि ये एयरक्राफ्ट डिफेंस वर्कर्स और स्माइकलिस्ट्स के लिए दिया गया है, बाकी 2021 में भारतीय सेना ने कहा था कि 75 भारतीय सैनिक अपने देश में काम कर रहे हैं। धीरे-धीरे भारतीयों को बाहर करने की मांग में जोर पकड़ लिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि व्यापार की सुरक्षा से समझौता हो रहा है। यह अब एक बड़ी संपत्ति बन गई है।

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वर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को भारत का पक्ष लेने वाला राष्ट्रपति माना जाता है। (प्रतीकात्मक चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स)

चीन की ओर कबा सुपरमार्केट
2013 से 2018 के दौरान राष्ट्रपति रह चुके अब्दुला यामीन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिन के साथ उनकी महत्वपूर्णकाशी रोड एंड बेल्ट इनिशिएतिवा के साथ भागीदारी का समझौता किया था। उस दौर में भारत और पश्चिमी देशों में यामीन को अपमान के आरोपों के चलते कर्ज नहीं दे रहे थे जिससे यामीन ने चीन की ओर रुख किया। यामीन अभी भी जेल में बंद हैं और यामीन का ही आरोप जेल में बंद है।

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साफ है कि यामीन के भारत से कटु संबंध होने की वजह से चीन सोलिह के खिलाफ उम्मीदवार का ही समर्थन चाहता हूं। भारत ने हाल ही में चीन के ऋणों की भरपाई का प्रयास किया है और अब तक दो अरब डॉलर दिए गए हैं। व्यवसाय में कई लोग भारत की नौकरी पर संदेह करते हैं। कई लोगों का मानना ​​है कि भारत में किसी भी देश से कोई संबंध नहीं बनाना चाहिए। वर्तमान चुनाव सोलिह के लिए भारी भरकम माना जा रहा है क्योंकि वे छोटे आश्रम अपने साथ में सफल नहीं हो रहे हैं। इस चुनाव के नतीजे हिंद महासागर में विक्राला की लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ ज़रूर आएगा।

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