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सिर्फ 15 मिनट में गेंज क्लॉज से शॉक, इन 3 तकनीक से होगा कमाल, डॉक्टर से मिले लेजर सर्जरी की तकनीक


उत्तर

लेजर आई सर्जरी के जरिए लोगों का चश्मा निकालने में कुछ मिनट का वक्त लगता है।
लेजर आई सर्जरी को सुरक्षित माना जाता है और इसके दुष्प्रभाव बेहद कम होते हैं।

लेज़र नेत्र शल्य चिकित्सा क्या करती है: आज के समय में बेहद कम उम्र में लोगों की नजरें खराब हो रही हैं। आजकल छोटे-छोटे बच्चों को भी चश्मा लगाए देखा जा सकता है। आइसाइट कम होने पर पैनल का सहारा लिया जाता है। बैग की मदद से लोग अपनी ज़रूरत की चीज़ों को सही तरीके से देख सकते हैं। लंबे समय तक चश्मा लगाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है और लोग कई बार चश्मा घर भूल जाते हैं। ऐसे में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार चश्मा टूट जाता है और परेशानियां पैदा हो जाती हैं। कई लोगों को निराशा हो रही है और चश्मे को लेकर जाना चाहते हैं। इसके लिए वर्तमान समय में कई तकनीकें मौजूद हैं। इन प्रौद्योगिकी की सहायता से कुछ मिनट में क्लॉज से चित्र प्राप्त किया जा सकता है। आज आइस्ट स्पेशल से जानेंगे कि किन लोगों से चश्मा हटाया जा सकता है और यह तकनीक दृष्टि कैसे ठीक होती है।

नई दिल्ली के सिरी फोर्ट स्थित विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. तुषार उत्पादक के अनुसार चश्मा हटाने के लिए मुख्य रूप से 3 तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। ये सभी सामालिक सामान होते हैं और सामुहिक सहायता से आंखों का नंबर निकाला जाता है। पहली तकनीक लेसिक (LASIK) है, जिसमें लेजर सर्जरी के जरिए कॉर्निया को सेलेट किया जाता है। ऐसा करने से लोगों का विज़न ठीक हो जाता है और चश्मे का नंबर मिल जाता है। दूसरी तकनीक लेंटिक्यूल बेस्ड प्रोसीजर (लेंटिक्यूल आधारित प्रक्रिया) है। इसमें SMILE, CLEAR जैसे अलग-अलग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लोगों की कॉर्निया पर लेजर की मदद से लेंटिक्यूलेशन बनाया जाता है और उसे बाहर निकाल दिया जाता है। लेजर आई सर्जरी की तीसरी तकनीक फ़ाकिक आईओएल (फाकिक आईओएल) है। इसमें लोगों की आंखों के लिए चश्मा निकालने के लिए स्टॉक एक्सचेंज के ऊपर एक स्टॉक जमा होता है।

लेजर से पहले की जाती है डॉक्टर

डॉ. फ्रोज़न ग्रोवर का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की आई सर्जरी से पहले चश्मा निकाला जाता है। इसमें कॉर्निया की थिकनेस, कॉर्निया की स्पीच, कॉर्निया की मोटाई, आंखों की बिजनेस और थोक का टेस्ट होता है। इसमें पता चलता है कि मरीज की सर्जरी हो सकती है या नहीं। साथ ही सर्जरी के लिए कौन सी तकनीक का इस्तेमाल बेहतर जीवन के लिए किया जाए, यह भी डॉक्टरों के बाद ही पता चलता है। लोगों के कंडीशन के अनुसार तकनीक का इस्तेमाल करने से चश्मा उतर जाता है। चश्मा हटाने की तीसरी प्रक्रिया में 10 से 20 मिनट का वक्त लगता है। लेजर आई सर्जरी की तकनीक ही तकनीक काफी सुरक्षित हैं। चश्मा हटाने के बाद दुष्प्रभाव बहुत अधिक हो जाते हैं।

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सर्जरी की सही उम्र क्या है?

डॉक्टर के अनुसार लेजर आई सर्जरी करने से लोगों की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। इससे कम उम्र के लोगों की सर्जरी नहीं की जाती, क्योंकि इस उम्र में पल्स का नंबर बदलता रहता है और स्थिर नहीं होता है। 18 साल के बाद प्लाज्मा का नंबर स्थिर हो जाता है और टैब सर्जरी की जाती है। अगर अधिकतम उम्र की बात की जाए, तो 45 साल तक के लोग लेजर आई सर्जरी करवा सकते हैं। इससे अधिक उम्र के लोगों की सर्जरी आमतौर पर नहीं की जाती है।

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