नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) में बुधवार को सदन में वोट के बदले नोट मामले की सुनवाई होगी, जिसके लिए 7 जजों की संविधान पीठ का गठन किया गया है। इस मामले में सीजेआई (सीजेआई) दिवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जेबी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच याचिकाएं शामिल हैं। साल 2017 के बाद पहली बार सुप्रीम कोर्ट में 7 जजों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई हुई। 2017 में जस्टिस सीएस कर्णन केस में 7 जजों की बेंच पर आय के लिए आवेदन किया गया था।
20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सदन में रिश्वत के लिए वोट देने के लिए सामूहिक/विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से छूट पर फिर से विचार करने को अपनी सहमति दे दी थी। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 1998 के पीवी नरसिम्हा राव मामले में अपने फैसले पर फिर से विचार कर निर्णय लिया था। अब यह तय हो गया है कि यदि कोई भी अल्पसंख्यक या विधायक सदन में वोटिंग के लिए रिश्वत लेता है, तो उस पर मुकदमा चलेगा या नहीं? 1998 के नरसिम्हा राव केस के चरित्र को आदर्श से छूट मिलती है। अब यही जजमेंट पर विचार होगा.
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वोट के बदले नोट वाला केस क्या है?
वोट के बदले नोट का केस सीता सोरेन बनाम भारत संघ है। इस मामले में प्रशांत महासागर की भाभी हैं। वे एक समय हुए वोट फॉर नोट मामले की भी वजह हैं। 2012 में सीता सोरेन के खिलाफ़ गोपनीय जांच की मांग की गई थी और चुनाव आयोग में याचिका दायर की गई थी। यह रिश्ता साम्यवादी कम्युनिस्ट पार्टी के रिवाल्वैट लेने से टूटा है और इसके कनेक्श्न नरसिम्हा राव केस से है जब मशाल ने वोट के बदले नोट के लिए थे। ये मसला श्लोक 194 के प्रॉज 2 से टूर है, जहां रेस्टोरेंट्स को उनके घरों में वोट के लिए रखा गया था, लेकिन बड़प्पन लेने के लिए मोटरसाइकिल में नहीं जा सकते थे, उन्हें छूट दी गई है।
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पहले प्रकाशित : 3 अक्टूबर, 2023, 23:20 IST
