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मालेगांव ब्लास्ट: जब कोर्ट में अचानक रो पाटं प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कोर्ट को रोकनी सुनाई गई


मुंबई: वर्ष 2008 में महा फौजदार के मालेगांव में बम विस्फोट मामले की मुख्य याचिका और भारतीय जनता पार्टी की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर मंगलवार को मुंबई में स्थित विशेष आपराधिक अदालत के समक्ष पेश हुईं, जहां उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। ये बात उनके वकीलों ने कही. कमोबेश ठाकुर से लगभग पांच करोड़ की संपत्ति से संबंधित प्रश्न पूछे गए, आरोप है कि विस्फोट मामले में मृतक के अवशेषों का इलाज किया गया था, लेकिन उन्होंने नकारात्मक उत्तर दिया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, मालेगांव 2008 ब्लास्ट केस की सुनवाई के दौरान गवाहियां बॉक्स में बोलीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर, एक बार ऐसा भी आया, जब वह भावुक हो गईं और कोर्ट की कार्यवाही 10 मिनट के लिए रोक दी गई , जब तक वह शांत नहीं हो गया। बाद में वकील जे.पी. मिश्रा और प्रशांत मग्गू ने ये बात मीडिया को बताई.

विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश ए.के. लाहोटी मामले में बेघर लोगों और छह अन्य लोगों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज करना शुरू कर दिया गया है, जिसमें बेघरों को उनके सबूतों में सामने आने वाले अवशेषों का मामला दर्ज करने का अवसर मिला है। इस मामले में प्रज्ञा के अलावा अन्य वेश्याएं हैं- सेवानिवृत्त मेजर रमेश उपाध्याय, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर चौधरी, अजय रायरकर और समीर कुलकर्णी।

मालेगांव ब्लास्ट: जब कोर्ट में अचानक रो पाटं प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कोर्ट को रोकनी सुनाई गई

दिसंबर 2018 में मुकदमा शुरू होने के बाद अदालत ने अब तक 323 गवाहों की गवाही दर्ज की है, जिसमें 34 मुकर गए हैं। विशेष न्यायाधीश लाहोटी के पूर्व आदेश (25 सितम्बर) के अनुसार सभी 7 मूल न्यायालय में उपस्थित थे। रविवार को भी बयान दर्ज करवाएं. 29 सितंबर, 2008 को नासिक के मुस्लिम बहुल शहर मालेगांव में जुमा के दिन एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल से बांधंकर रखे गए बम विस्फोट में लगभग 9 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

टैग: महाराष्ट्र, मालेगांव ब्लास्ट, सांसद प्रज्ञा ठाकुर, मुंबई खबर



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