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देश की आजादी के पहले यहां आए थे राष्ट्रपिता, आजादी के लिए चलाया था अभियान


रामकुमार नायक/रायपुरःपूरे देश में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती बड़ी धूम धाम से मनाई जा रही है। आज हम आपको छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक ऐसे स्थान के बारे में बताएंगे, जो महात्मा गांधी की यादों से जुड़ी हुई है। देश की आजादी के लिए जनजागरूकता फैलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ यात्रा पर आये थे। गांधीजी ने छत्तीसगढ़ के कई शहरों में बंद छुट्टियाँ और राष्ट्र की भावना जागृत करने के लिए प्रेरित किया था। राजधानी के जातू साव मठ भी महात्मा गांधी थे। इस जगह पर गांधीजी की यादों को बरकरार रखने के लिए गांधी स्मारक घोषित किया गया है। इस स्थान का नाम इतिहास में दर्ज हो चुका है।

जैतू साव मठ की राजधानी रायपुर की पुरानी दुकानें स्थित हैं। गांधीजी की यात्रा के दौरान उन्हें पता चला कि मठ के मूर्तियों से हरिणों का पानी लेना मनही है। तब गांधीजी ने स्टेनलेस छुट रेस्टॉरेंट और ब्लास्ट के साथ मिल जुलकर बने रहने की प्रेरणा दी। एक दलित बच्ची से पानी की निकासी को कहा गया। बच्ची ने पानी निकाला और गांधीजी ने पानी पिया, इसके बाद अन्य लोगों ने भी पानी पीकर स्टेनलेस छुट का विध्वंस का संकल्प लिया। जातू साव मठ के उस स्कोर को आज भी बचाया जा चुका है। गांधीजी की याद को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए मठ के बगल में ही गांधी भवन बनाया गया है। गांधीजी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

यहीं से गांधी जी की मृत्यु हो गई थी
श्री ठाकुर रामचन्द्र जी जयतू साव मठ न्यास समिति के सचिव मण्डर अग्रवाल ने कहा कि महंत लक्ष्मी नारायण दास जी इस मठ के सेवक थे। वे राज्य सदस्य सभा में बहुत बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। उनके समय में स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख केंद्र जीतू साव मठ था। पंडित सानिध्य शुक्ल, महान बन्धुवाल शामिल, उस समय के सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानी नेता इस मंदिर में आये थे। महात्मा गांधी द्वारा उस समय के समर्थन से समर्थन आंदोलन जारी था और क्षेत्र के लोगों के लिए स्वतंत्रता संग्राम पर सहमति व्यक्त की जा रही थी। गांधी जी रायपुर के जैतू साव मठ में दो बार आए थे, पहली बार 24 फरवरी 1933 को और दूसरी बार 1935 में। जब गांधी गांधी मठ मठ आंदोलन के दौरान आए थे, तब यहां एक दलित कन्या का पानी निकालकर स्वयं को निगल लिया गया था और लोगों को जल ग्रहण किया गया था। गांधी जी ने इस जातू मठ में लोगों से मुलाकात की और उनकी यात्रा यहां के लोगों के बीच स्वतंत्रता संग्राम को और भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण थी। गांधी भवन का निर्माण 1945 में हुआ था, तब यह टिन का शेड था, और अब इसका पक्का ऑडिट किया गया है, जहां सभा और कार्यक्रम होते हैं।

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