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यूपी, बिहार तक फेमस है…झारखंड का ये चूहा, एक दिन में 50 कुंतल होता है तैयार


आदित्य आनंद/गोड्डा. जिले के लुक-लुकी डुमरिया गांव स्थित एक मिल में तैयार होने वाला चूहा झारखंड में तो मशहूर है ही, इसकी साख यूपी और बिहार तक बनी हुई है। मिल में एक हफ्ते में सिर्फ 2 से 3 दिन का चूड़ा तैयार हो जाता है. शेष दिन गांव-गांव धूमकर किसानों से धान एकत्रित किया जाता है। एक दिन में 40 से 50 कुंतल चूड़ा तैयार होता है। उद्यम के अनुसार इस मिल में तैयार होने वाला चूहा काफी मीठा और स्वादिष्ट होता है, इसके विपरीत सोंधी सुगंध को खींच लाती है।

कच्चा चूड़ा के साथ-साथ इस मिल में जनवरी महीने में भूना हुआ चूड़ा भी तैयार हो जाता है. राज्य के विभिन्न जिलों में मकर संक्रांति पर्व मनाने वाली के लिए इसकी मांग होती है। यहां का चूड़ा बिहार व यूपी तक भेजा जाता है। मिल के गूढ़ व्यक्ति शाह ने बताया कि इस मिल में कुल 8 लोग काम करते हैं। सभी का काम अलग-अलग है। सप्ताह में 3 दिन के लिए वह गांव-गांव जाकर धान इकट्ठा कर लाता है और उसके बाद उसे धो कर, फूला कर चूड़ा तैयार कर लेता है।

कैसे तैयार होता है चूड़ा
एक बार में करीब 50 कुंतल धान को बड़े से होड़ में ढोकर फुलाया जाता है। करीब 12 घंटे तक धान को फुलाने के बाद उसे हाई ताप पर भून लिया जाता है. भूनने के बाद इसे मशीन में डाल दिया जाता है, जिससे धान फूट जाता है। इसके बाद इसे दूसरी मशीन में मैकेनिकल कूट कर चूड़ा बनाया गया। इसके बाद इसे बड़ी सी चालनी मशीन में स्टैंसिल धान और चोकर को अलग कर दिया जाता है। इसके बाद इसका विज्ञापन होता है और इसे व्यापारियों और कारखाने में बेचा जाता है।

जानिए चूड़े का रेट
इस मिल में तैयार होने वाले चूड़े को साफ करने के लिए किसी भी प्रकार का केमिकल या सर्फ का उपयोग नहीं किया जाता है, जिससे चूड़ा पूरी तरह से राक्षसी होता है। चूड़ा तैयार होने के बाद इसे 20, 22 और 25 केजी के पिज्जा में पैक कर दिया जाता है. थोक विक्रेताओं के लिए 25 रुपये केजी का पैकेट 750 रुपये में दिया जाता है और थोक विक्रेताओं के लिए 35 रुपये केजी का पैकेट दिया जाता है।

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