अनूप/कोरबाः सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए नि:शुल्क 108 संजीवनी एक्सप्रेस स्पीकर की सुविधा राज्यभर में उपलब्ध कराई है। इस प्रकाशक के माध्यम से कोई भी मरीज अचानक अस्पताल पहुंच जाता है। मरीज के अस्पताल में भर्ती होती ही अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी शुरू हो जाती है। उसके बाद अस्पताल के पूरे स्टाफ में मरीज की देखभाल में लग जाती है, लेकिन जब मरीज लावारिस होते हैं तब सबसे बड़ी परेशानी तब होती है।
अस्पताल स्टाफ की अनोखी पहल
कोरबा जिले के मेडिकल कॉलेज में लावारिस विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 108 नंबर पर फोन बजाते ही संजीवनी एक्सप्रेस के कहने पर मरीज को मेडिकल कॉलेज अस्पताल छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद वहां के स्टाफ मरीज की देखभाल में लग जाते हैं। अस्पताल में कई मरीज ऐसे आते हैं जो कुछ नहीं कहते और मानसिक रूप से बीमार भी हो जाते हैं। ऐसे में अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा मानव सेवा का परिचय देते हुए लावारिस और मानसिक लोगों की देखभाल की जाती है। पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद उन्हें अस्पताल से संविधान कर दिया जाता है।
लावारिस लोगों की हो रही देखभाल
कोरबा के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में आउटडोर वार्ड बॉय के सागर ने बताया कि कुछ ऐसे मानसिक रोगी आते हैं, जो कुछ नहीं होते और भी बहुत खराब स्थिति में होते हैं। जिसमें पूरी तरह से सफाई के साथ बेहतर उपचार दिया जाता है। इस दौरान मस्जिद के महल की पतासाजी भी चल रही है। किसी भी व्यक्ति से मुलाकात न होने पर वह एक सामाजिक संगठन के द्वारा आश्रम में प्रवेश कर सकता है, जहां वह आराम से रह सकता है।
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पहले प्रकाशित : 5 अक्टूबर, 2023, 17:41 IST
