
नारायण प्रकाश सूद, नेपाल के विदेश मंत्री
नेपाल में कुछ दिन पहले शुरू हुए साम्प्रदायिक तनाव के बीच जनता के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। नेपाल सरकार द्वारा वोट के हित में दिए गए इस जजमेंट में चीन भी साथ खड़ा है। सरकार के इस ऐलान से दुनिया भर के दोस्ती में खुशियों की लहर दौड़ गई है। नेपाल के विदेश मंत्री नारायण प्रकाश सउद ने कहा कि हमारी सरकार इस बार तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर तक हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए सबसे छोटे मार्ग यात्रा के उद्देश्य से 1 अरब हिंदू तीर्थयात्रियों की मदद करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के भगवान को इस पवित्र स्थान की यात्रा में मदद करने की योजना में चीन भी साथ दे रहा है। इस योजना को चीन के साथ एक सटीक अमल में लाने के बाद सांख्यिकी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
नेपाल के विदेश मंत्री नारायण प्रकाश सउद ने कहा कि तिब्बत के तिब्बती क्षेत्र के नगरी में स्थित कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा को पुर्तगालियों द्वारा सबसे पवित्र यात्रा के रूप में माना जाता है। तिब्बत में मौजूद दो प्राकृतिक पवित्र स्थलों में बौद्ध, जैन और तिब्बत के स्थानीय बोनपापा भी काफी विश्वास रखते हैं। सऊदी की यह महत्वपूर्ण कांशी योजना आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका से भारी संख्या में हिंदू नेपाल के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा करना पसंद करते हैं। इतना ही नहीं वे भारतीय, जो समय बचाना चाहते हैं और भारतीय क्षेत्र में आने वाली कठिन परीक्षा से बचना चाहते हैं वे भी निजी पेशेवरों के माध्यम से नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने का विकल्प हैं। इस वजह से यह यात्रा नेपाल सरकार के लिए एक फायदे का सौदा साबित होती है।
नेपाल कैलास मानसरोवर यात्रियों के लिए सबसे छोटी पैदल यात्रा कार्गो
अंधविश्वास महामारी की वजह से लॉकडाउन के बाद चीन ने इस साल कैलास मानसरोवर तीर्थ यात्रा को खोल दिया था। हालाँकि शुल्क में भारी वृद्धि और विशेष रूप से भारतीय शिष्यों के शिष्यों पर कई रेस्तरां की वजह से यात्रा में उम्मीद के मुताबिक लोग नहीं थे। तिब्बत के कई सिद्धांतों में चीन की आठवीं यात्रा शामिल है, जिसमें अनंत सूद ने ललितपुर जिले में कहा, ”विश्व भर के भगवान के लिए कैलाश मानसरोवर आकर्षण का एक महान केंद्र है। सभी हिन्दू तिब्बत में स्थित इस पवित्र स्थान तक दर्शन करना चाहते हैं। नेपाल, अंतरराष्ट्रीय यात्री कैलास मानसरोवर तक सबसे छोटी यात्रा कर सकते हैं। आने वाले दिनों में हम चीन के आदिवासियों के साथ नेपाल की राह पर कैलास क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चर्चा करेंगे। हम चीन सरकार से पहले ही त्रिस्तरीय प्रकृति को कह चुके हैं और चीन सरकार ने इस मामले पर साकरात्मक रुख अलग रखा है।
नेपाल के साथ भारतीय यात्रियों की सुविधा के लिए चीन से बात करें
”कैलासा मानसरोवर क्षेत्र तक पहुंचने के लिए नेपाल से यात्रा करने वाले तीन मार्ग हैं- हुमला जिले का हिल्सा, बझांग का खोरी और दार्चुला जिले का टिंकर हैं। ये सभी मार्ग पश्चिमी नेपाल में स्थित हैं। वहीं मानसरोवर झील हुमला जिले का मुख्यालय सिमिकोट से लगभग 160 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित है। सउद ने कहा, ”सबसे पहले हम चीनी अप्रवासन अधिकारियों के साथ एक समझौता करना चाहते हैं ताकि नेपाली और भारतीय यात्रियों और यात्रियों के लिए मानसरोवर की यात्रा आसान हो सके।” इसके लिए दोनों देशों के अधिकारियों को नियमित रूप से संपर्क में रहना होगा।”
विदेश मंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले श्रद्घालुओं के लिए सिर्फ तीन प्रवेश पदों के बजाय चीन, नेपाल और चीन के बीच 14 प्रवेश पदों का प्रस्ताव दिया गया है, उनका मकसद आम यात्रियों और माले में शामिल होने की सुविधा है और हम हैं। इस पर अध्ययन कर रहे हैं। सउद ने जोर देकर कहा, ”अध्ययन करने के बाद हमें अवशेष ढांचे, मोटर वाहन योग्य सड़कें और आतिथ्य परियोजनाएं विकसित करने की जरूरत होगी।” अगर हम इन तरीकों से प्रशासन करने में सफल हो जाते हैं तो हम अरबों के लिए इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।’ (भाषा)
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