
अमेरिका ने मार प्लांट तुर्की का पतन किया
ट्रूकी ड्रोन पर अमेरिका का हमला: अमेरिका और तुर्की दोनों नाटो संगठन के सदस्य हैं। इसके बावजूद अमेरिका ने तुर्की के साम्राज्य को सीरिया में मार दिया है। किसी भी नाटो देश पर संगठन द्वारा हमला करने का यह दुर्लभ मामला है। जानकारी के अनुसार सीरिया में अमेरिकी सुरक्षा सेना ने तुर्की के समुद्र तट से समुद्री तट को मारा। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने तुर्की के हथियार डुप्लिकेट समुद्री मील को मार डाला है जो उत्तर पूर्व सीरिया में अमेरिकी सुरक्षा बलों के 500 मीटर के करीब पहुंच गया था।
तुर्की की बमबारी से सहमे अमेरिकी सुरक्षा बल
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों में से एक के खिलाफ यह दुर्लभ मामला है। पेंटागन के प्रेस सचिव ब्रिगेडियर जनरल पैट्रिक रेडर ने इसे ‘खेदपूर्ण घटना’ बताया। साथ ही कहा कि अमेरिकी सुरक्षा बलों को सुरक्षा के लिए बैंकों में रखा गया था क्योंकि तुर्की उनके आस-पास बमबारी कर रहा था। रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने तुर्की के अपने समकक्षों से और क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई के बारे में बात की, अमेरिकियों की सुरक्षा, एकजुटता या वैश्विक गठबंधन के अभियान को किसी खतरे से रोकने के लिए दोनों देशों के बीच निकट सहयोग के महत्व पर जोर दिया। ।।
अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी था हमला: अमेरिका
रेडर ने कहा, ‘यह फैसला अमेरिकी सेना की सुरक्षा के लिए कार्रवाई और आत्मरक्षा के अधिकार के तहत लिया गया है।’ अमेरिकी अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) पर नाम जाहिर करते हुए बताया, ‘हमें संकेत मिला कि तुर्की ने अमेरिकी सुरक्षा को कमजोर कर दिया है।’ उन्होंने कहा कि तुर्की के सैन्य अधिकारियों को कई बार फोन करके बताया गया था कि इलाके में अमेरिकी सुरक्षा बल मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्होंने ऐसा जारी किया और वहां से घुसपैठ नहीं की।
अमेरिकी सुरक्षा सैनिकों से केवल 1 किमी दूर का तूफानी हमला
इस कारण अमेरिकी सुरक्षा बलों की आत्मरक्षा में यह निर्णय लिया गया। रेडर ने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पाया कि स्थानीय समय पर दोपहर करीब साढ़े बजे तुर्की के समुद्र तट पर हवाई हमले किए जा रहे हैं और कुछ हमले अमेरिकी ज्वालामुखी ऑपरेशन क्षेत्र से एक किलोमीटर की दूरी पर हो रहे थे। उन्होंने बताया कि कमांडरों ने इसे यूएस एफ-16 लड़ाकू विमान खतरा माना के लिए रखा था और सुबह 11 बजे 40 मिनट तक उस पर हमला किया।
नाटो संगठन के देश में एक और के लिए अवशेष हैं, यहां उलगुलान पड़े
तुर्की और अमेरिका दोनों ‘नाटो’ सैन्य संगठन के सदस्य हैं। नाटो एक ऐसा संगठन है जिसमें यदि इस संगठन के किसी भी देश पर हमला होता है, तो नाटो सैन्य संगठन अपना पक्ष खड़ा कर देगा। लेकिन तुर्की और अमेरिका दोनों ही नाटो सैन्य संगठन के सदस्य होने के बजाय एक दूसरे के लिए एक दूसरे से उलझे हुए हैं। यही नहीं, अमेरिका ने तो तुर्की जो नाटो का सदस्य देश है, उसका आततायी समुद्री तूफान। क्योंकि अमेरिकियों को खतरा था। नाटो सैन्य संगठन के दो देशों पर एक दूसरे पर हमले की इस तरह की दुर्लभ संभावना है।
यह भी पढ़ें:
भारत के पक्ष में बोले रूसी राष्ट्रपति यूएसएसआर, जानिए कनाडा के किस बड़े नेता को कहा था ‘आइडियट’?
वैगनर प्रमुख येवेगनी प्रिगोज़ोन की मौत पर बड़ी खबर, जानिए क्या बात?
