अनूप/कोरबाः कोरबा में सर्व समाज द्वारा कर्म पूजा का आयोजन किया गया। कर्मा पूजा मुख्यत: पवित्रशास्त्र की संस्कृति में बेहद खास पूजा होती है, जिसमें अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कर्मा उत्सव में एक विशेष नृत्य किया जाता है। जिसे कर्मा नृत्य (कर्मा नाचा) कहा जाता है।
छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला आदिवासी बहुल जिला है, जहां की संस्कृति को बरकरार रखने का हमेशा से प्रयास किया जाता रहा है। दर्री पश्चिम क्षेत्र में परिवर्तिनी एकादशी पर कर्मा पूजा का उत्सव उत्सवी माहौल में किया गया. जनजातीय समाज के इस आयोजन में सर्व समाज की भागीदारी रही। विधान से कर्म पूजा की विधि. जहां जनाब नृत्य लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मांदर और नगाड़े की थाप पर समाज के लोग भी थिरकते हैं।
नई फ़सल आने की ख़ुशी में करते हैं पूजा
कर्मा पर्व भाद्रपद मास की तृतीया को झारखण्ड, छत्तीसगढ़ के पर्व हर्षोलस द्वारा मनाया जाता है। इस अवसर पर स्मारक व्रत के दूसरे दिन करम वृक्ष के डाल को घर के आंगन में रोपित कर करम देवता की पूजा की जाती है। पूजा- पूजन करने के बाद स्त्री-पुरुष नाग, मांदर और बांसुरी के साथ करम शाखा के चारों ओर करमा नाच-गान करते हैं। करम डांस को नई फ़सल आने की ख़ुशी में लोग नाच-गाकर लगते हैं। करमा पर्व में विभिन्न आदिवासियों और गैर-आदिवासी समाज द्वारा मनाये जाने वाले कार्यक्रमों में बागा, उराँव, भुईया, मुंडा, कोरवा, बिजवार शामिल होते हैं।
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पहले प्रकाशित : 27 सितंबर, 2023, 16:40 IST
