आखिरी बड़कुल/दमोह. उत्तर प्रदेश के दमोह जिले के अधिकांश गोदामों में मिरी नीम औषधि के पौधे पाए जाते हैं। इसका उपयोग घर की रसोई से लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ तक कई गोलियों से प्राप्त किया जा सकता है। इसकी ताज़ा ताज़ा में एक अलग ही विशेषता है जो खाने के स्वाद को तो बढ़ाती ही है, साथ ही सेहत को भी बहुत लाभ पहुँचाती है। मीठी नीम के औषधीय गुणों से भरपूर है कई लोग ‘कारी पत्ता’ के नाम से भी जानते हैं मीठी नीम।
हर रोज 6 से 7 कच्ची कैरी दुकानदारों को खाली पेट एक गिलास पानी के साथ चबाने से आपकी सेहत को बहुत सारा लाभ मिलता है। इस पत्ते का पानी पीने से दिल की बीमारी से भी बचाव होता है। इसके साथ ही बदहजमी, डीएसटी, उल्टी, पेट दर्द, मरीज़ आदि से संबंधित समस्याओं का भी सेवन किया जाता है।
कई गंभीर बीमारियाँ
आयुर्वेदिक चिकित्सा डॉ. दीप्ति नामदेव ने बताया कि इस औषधि का उपयोग कई औषधियों में होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे घर में यह औषधि पौधा होने के बावजूद भी हम इसका सेवन नहीं करते हैं। इसका नित्य दिन सेवन करने से दिल की बीमारी से बचा जा सकता है। बालों को स्टाइल से खरीदा जा सकता है। शरीर का वजन कम होता है. इसके अलावा मूत्र रोग, दाद-खाज-खुजली, त्वचा रोग, बुखार, कीड़े मकोड़े के कटर का भी उपयोग किया जाता है। स्वास्थ्य के लिए मीठी नीम का सेवन करने का एक तरीका तो है। यह ऑपरेटर से भी रेडियोधर्मी पौधा वाला है, जो गुणकारी भी है।
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पहले प्रकाशित : 7 अक्टूबर, 2023, 11:24 IST
