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एम्स में अब प्रासंगिकता की बातें, भर्ती के लिए शुरू हो सकता है यह नया विभाग, बनी समिति


अफ़् ऑल इंडिया हेल्थकेयर ऑफ मेडिकल साइंसेज में मेडिकल साइंस से इलाज का सबसे अच्छा अस्पताल है लेकिन अब इसमें आपको मेडिकल साइंस से इलाज का मौका भी मिल सकता है। एम में काफी पहले से भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे योग, आयुर्वेद और नेचुर पैथी को लेकर शोध चल रहा है। यहां योग थेरेपी सेंटर की भी शुरुआत हुई। इसके अलावा आयुर्वेद पथ्याहार के आरक्षण में भी बदलाव किया गया है, लेकिन अब एम्स में भी एक कदम बढ़ कर आयुर्वेद चिकित्सा विभाग शुरू हो सकता है। इसके लिए एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने आदेश जारी कर समिति सोसाइटी की है।

हाल ही में समिति के गठन के आदेश के बाद इस विभाग को लेकर प्रश्न भी उठ रहे हैं और फैकल्टी हेल्थकेयर को लेकर संशय भी बढ़ रहा है। हालाँकि, पुर्तगालियों की सलाह पर विशेष चिकित्सा विभाग शुरू हो जाएगा और जल्द ही इसका लाभ भी मिलेगा। इसके पार्ट की जा रही हैं.

इस बारे में एम बंधन के मीडिया डिविजन के चेयरपर्सन डॉ. रीमा दादा का कहना है कि एम्स में पहले से ही योग, ध्यान पर काम हो रहा है। एम न्युमरोलॉजी का सेंटर फॉर एक्लीलेंस में पहले से ही योग निद्रा आदि पर कई शोध किए गए हैं। एम में एलोपैथ, योग, ध्यान से जुड़े लोगों के साथ एक साथ काम करने की बात चल रही है।

इसके अलावा एम ट्रांसप्लांट में ट्रांसप्लांट विभाग शुरू हो गया है जिसमें लिवर, किडनी, हार्ट, अन्य बीमारियों की बीमारियां और ग्रोथ शामिल हैं। संस्थान में इसके लिए पहले से ही फैकल्टी हैं। कुछ फ़ैकल्टी बाहर से भी नियुक्त होंगे। एम्स ने 31 अक्टूबर को इस समिति से आग्रह के लिए कहा है। इसके बाद एम्स प्रशासन इस पर कदम उठाएगा।

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