कृष्ण कुमार
नागौर. आज हम एक ऐसे गांव की करने वाले हैं जहां ज्यादातर लोग सिर्फ एक ही खेल को खेलने की बात करते हैं। इस गांव के बच्चे हो या बड़े आप सभी फुटबॉल खेलते दिखेंगे। अब इसी गांव का साधारण सा बॉय नेशनल टीम का स्मरण बन गया। ऐसा किसी ने भी नहीं सोचा था. मनोज फिडोदा आज फुटबॉल नेशनल टीम के सदस्य हैं। वे अब अपने गांव के साथ-साथ जिले के लोगों से भी खेल के प्रति संपर्क कर रहे हैं।
कौन हैं मनोज फिदोदा
मनोज फ़िदोदा नागौर जायल के फ़रादोद गाँव में रहने वाले हैं। वह स्पोर्ट्स फ़ैमिली सेलेब रखे हुए हैं। तीनों राजस्थान की तरफ से फुटबॉल टीम के खिलाड़ी रह चुके हैं। अपने निर्णय से प्रेरणा लेकर फुटबॉल खेलना शुरू हुआ। इनके परिवार में बड़े भाई और पिता दोनों फुटबॉल प्रतियोगिता थे।
पिता से प्रेरणा मिली और गुरु ने माँगी
मनोज ने बताया कि पिता की प्रेरणा से उन्होंने फुटबॉल में दाखिला लिया लेकिन सरकारी नौकरी में होने की वजह से पिता ने इतना ध्यान नहीं दिया। जिस तरह महेंद्र सिंह धोनी के हंगेरियन को उनके गुरु ने नाराज किया था, उसी तरह मनोज के हंगेरियन को गुरु ने बगावत किया था, उन्होंने कहा था कि मनोज ने फुटबॉल खेल का प्रशिक्षण दिया और एक काबिल खिलाड़ी बनाया।
आज फुटबॉल खिलाड़ी खिलाड़ी से राष्ट्रीय रिफरेंस
मनोज फिदो ने कक्षा 3 से फुटबॉल खेल प्रारम्भ कर दिया था। फ़ुटबॉल के प्रति जुनून के कारण रोज़ाना पढ़ाई करने के बाद 6-7 घंटे अभ्यास करते थे। नागौर जिले से सबसे पहले अपने स्कूल की तरफ से इन्होनें खेलें। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के कारण धीरे-धीरे धीरे-धीरे यह उनके खेल में बेहतर होता गया।
नागौर की तरफ से पहले संतोष ट्रॉफी वाले खिलाड़ी बने। खेल में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण उन्हें राष्ट्रीय टीम का रैफरी भी चुना गया।
100 से अधिक ट्रॉफी व मेडल
मनोज को खेल में लगातार अच्छा प्रदर्शन के अब तक 100 से अधिक ट्रॉफी और मेडल मिल चुके हैं।
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पहले प्रकाशित : 14 जनवरी, 2023, 18:47 IST
