निखिलेश प्रताप सिंह/उन्नाव. कबाब पराठे की बात करें तो आपने वेज और नॉनवेज दोनों तरह के पराठे खूब खाए होंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के युवा जिलों में मिलने वाला कबाब पराठा अगर आपने नहीं खाया तो आपने असली कबाब का स्वाद नहीं लिया है.
दरअसल हम ऐसा कह रहे हैं क्योंकि कभी ठेले पर शुरू हुई कबाब पराठे की दुकान आज शहर के मशहूर रेस्तरां का रूप ले चुकी है। थेले पर दुकान की शुरुआत करने वाले अनिल कहते हैं कि आज लोग पराठा लेने के लिए, स्वाद चखने के लिए कुछ देर तक इंतजार करते रहते हैं।
गुणवत्ता से कभी सहमति नहीं बनी
गांधीनगर शहर के पास संचालित भोला रेस्तरां एक ऐसा रेस्तरां है जहां टोकन सिस्टम लागू है। इस व्यवस्था से प्राप्त आंकड़ों से पता चल सकता है कि यहां आने वाले दर्शकों की संख्या कितनी होगी। इस दुकान के मालिक अनिल गुप्ता ने अपने इस बिजनेस की शुरुआत सबसे पहले शहर के एक ठेले से की थी, जिस पर शुरुआत में कबाब पराठा, वे बिरयानी ही उद्यम सह-संगठन थे। गुणवत्ता से समझौता न करने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान देने के लिए व्यापारिक दुकानों की संख्या दिन-ब-दिन गंदी हो गई, जिसके बाद अनिल ने कपूर स्टैंड के पास गांधी नगर में एक किराए की इमारत में अपने कबाब पराठा स्टाल को रेस्तरां का रूप में उद्धृत हुए नए सिरे से शुरुआत की। उनके स्वाद के मुरीदों की भीड़ यहां भी बढ़ती जा रही है। यहां पर अब कबाब पराठा और वेज बिरयानी ही नहीं बल्कि साउथ इंडियन, चैनीज डिसीज के साथ-साथ दोस्त देश के व्यंजन परोसे जाते हैं, दूसरे स्वाद लेने के लिए दूर से ग्राहक खान्दे चले आते हैं।
शहर का पहला टोकन सिस्टम वाला रेस्तरां
भोला वेसे कबाब पराठा के सरगना अनिल गुप्ता ने बताया कि वह सभी को खरीदने के लिए खुद गए हैं और घर में भूनकर उन्हें पिसवाते हैं। इतनी ही दुकान में सफाई का प्रावधान नहीं है। अनिल गुप्ता ने कहा कि अगर कोई गरीब बिन पैसे की दुकान पर आता है तो वह उसे कबाब पराठा फ्री में खिलाता है। कमाई इतनी होती है कि 7 से 8 परिवार के खर्चे चल रहे हैं. लॉजिक जिले में यह पहला ऐसा दुखान है जहां पर लॉजिस्टिक सिस्टम लागू किया गया है।
.
पहले प्रकाशित : 7 अक्टूबर, 2023, 09:30 IST
