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आचार संहिता के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई कई तरह की हो सकती है
आचार संहिता लागू होने के बाद संबंधित राज्यों में किसी भी लोकलुभावन की घोषणा नहीं की जा सकेगी।
भारतीय चुनाव आयोग ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम के चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही पांच राज्यों में भी चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है। क्या होती है ये आचार संहिता. इससे किस तरह से सभी एंटरप्राइज़ दल और बन्धु मिलते हैं। वो हम आपको यहां कहते हैं।
मिजोरम में 07 नवंबर को वोट डालेंगे तो छत्तीसगढ़ में दो चरण में वोटिंग होगी, ये तारीख 07 नवंबर और 17 नवंबर को होगी। मध्य प्रदेश में चुनाव 17 नवंबर को होंगे. राजस्थान में 23 नवंबर को वोट डालेंगे। तेलंगाना में वोटिंग दिनांक 13 नवंबर है।
देश में स्वतंत्र चुनाव के लिए बनाए गए चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए इन पार्टियों यानी आचार संहिता का पालन करना सभी राजनीतिक संस्थाओं की ज़िम्मेदारी है।
पांच राज्यों में चुनाव की तारीख के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई। इसके तहत कई नियम हैं, जिनका पालन जरूरी होता है। साथ ही नियम तोड़ने वालों को सजा का भी प्रावधान है। आचार संहिता के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई कई तरह की हो सकती है। तो नियम न तोड़ें या फिर नियम तोड़ने वालों की जानकारी सही विभाग तक पहुंचाएं, इसके लिए जान लें कि आचार संहिता के नियम क्या हैं।
आदर्श आचार संहिता के कारण इन चित्रों को शामिल किया जाता है, ताकि किसी भी तरह से मतदान प्रभावित हो सके। जैसे,
1. सार्वजनिक उद्घाटन, फ़्लोरिडा बंद।
2. नये बिजनेस की शुरूआत बंद होगी।
3. सरकार की सलाह वाले होर्डिंग्स नहीं।
4. संबंधित इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नहीं होगा स्टूडियो टूर।
5. सरकारी सामुहिक संघ में नहीं यूक्रेनी सायरन।
6. सरकार की ओर से जारी किए गए वीडियो देखें।
7. सरकारी बोर्ड में सीएम, मंत्री, राजनीतिक लोगों के फोटो वर्जित हैं।
8. सरकार की तरफ से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य मीडिया में विज्ञापन न दें।
9. किसी भी प्रकार से रिश्वत या उत्पीड़न से मुक्ति। ना दे, ना लें.
10. सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर खास ख्याले। आपकी एक पोस्ट आपको जेल डिपार्टमेंट के लिए काफी है। इसलिए किसी भी तरह के संदेश को साझा करें या पोस्ट से पहले आचार संहिता के निर्धारण पर ध्यान दें से पढ़ें।
आम आदमी पर भी लागू करें
कोई भी आम आदमी भी पुराने जमाने का उल्लंघन करता है, तो उस पर भी आचार संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसका काम यह है कि अगर आप अपने किसी नेता के प्रचार में शामिल हैं तो आपको इसमें शामिल होने के लिए साक्षियों को शामिल करना होगा। अगर कोई राजनेता आपको इन पदों पर काम करने के लिए कहता है तो आप उसे आचार संहिता के बारे में और भी ऐसा करने से मना कर सकते हैं। क्योंकि ऐसा पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई होगी। ज्यादातर मामलों में आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।
सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की जा सकती
राज्य में चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी हो रही है जब तक कि मतदाता आयोग के कर्मचारी नहीं बन जाते। चुनाव आचार संहिता चुनाव आयोग के बनाए गए नियम हैं, हर पार्टी और हर उम्मीदवार के लिए पालन करना जरूरी है। इसका उल्लंघन करने पर कड़ी सज़ा हो सकती है। चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है. एफआईआर हो सकती है और अभ्यर्थी को जेल भी जाना पड़ सकता है।
ये काम हैं बेरोजगार
चुनाव के दौरान कोई भी सरकारी सरकारी दौरा चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। किसी भी तरह से चुनाव के लिए सरकारी मंजूरी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यहां तक कि कोई भी पदधारी नेता सरकारी सामुहिक और मस्जिद का चुनाव के लिए उपयोग नहीं कर सकता। केंद्र सरकार हो या किसी भी प्रदेश की सरकार, न तो कोई घोषणा कर सकती है, न कोई निर्धारण, न कोई प्रमाण पत्र कर सकती है।
सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन भी नहीं होता है, जिससे किसी भी दल को विशेष लाभ मिल सके। इस पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक नियुक्त होते हैं।
ताइवान में विकिपीडिया से संबंधित है जानकारी
चुनाव आयोग से दावेदारों और पार्टियों को जुलूस या रैली और बैठक करने के लिए कहा जाता है। इसकी जानकारी स्टूडियो स्टेशन में भी है। सभा के स्थान और समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाती है।
टैब पर हो सकती है कार्रवाई
कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसा काम नहीं कर सकता, जिससे कि बोल्ट और धार्मिक या भाषाई लोगों के बीच समानता और घृणा हो। मत प्राप्त करने के लिए रिश्वत देना, दस्तावेज़ को परेशान करना भारी पड़ सकता है। चुनाव आयोग की कार्रवाई पर भी व्यक्तिगत अपलोड किया जा सकता है।
शराब या पैसे देना मनही
किसी के स्वामित्व के बिना उसकी दीवार या भूमि का उपयोग नहीं किया जा सकता। मतदान के दिन मतदान केन्द्र से सौ मीटर के मत में चुनाव प्रचार पर रोक और मतदान से एक दिन पहले किसी भी बैठक पर रोक लग जाती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई भी सरकारी भर्ती नहीं की जाएगी। चुनाव के दौरान ऐसा माना जाता है कि कई बार शराब की बोतलें बनाई जाती हैं, इसलिए मतदाताओं द्वारा शराब का वितरण करने का नियम बिल्कुल सही माना जाता है।
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पहले प्रकाशित : 9 अक्टूबर, 2023, 12:33 IST
