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रोज़ाना खा सकते हैं मल्टिग्रेन रोटियां, रोज़ाना खा सकते हैं फ़ायदे-नुक्सान, एक प्लांट से जान लें


उत्तर

मलय फिल्टीग्रेन एफ़र्ट्स की रोटियाँ डायबिटीज़ के लिए कमाल की होती हैं।
कुछ शर्तों में छोटे मीट्स का आटा खाना मनही रहता है.

क्या आपको मल्टीग्रेन रोटी खानी चाहिए: आम तौर पर हमारे समूह में रोजमर्रा की रोटी की रोटियां ही बनाई जाती हैं लेकिन सेहत को लेकर सावधानी बरत रहे लोग अब न केवल मिलने वालों को अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं बल्कि घरों के घरों के बजाय घर के घरों में रोटी की रोटियां खाना पसंद कर रहे हैं। ये एक ट्रेंड बन गया है. बाजार में भी कई तरह के मल माल्टीग्रेन आटे की रोटियां आसानी से उपलब्ध हैं, जिनमें बाजरा, रागी, जौ, चना, गेहूं, ज्वार, कोदो, कुट्टू आदि शामिल हैं, लेकिन परिचितों के मुताबिक ये है कि हम रोज माल पालीग्रेन आटे की रोटियां खा सकते हैं। ? प्रोटीनयुक्त अनाजों को बड़े पैमाने पर बनाया गया आटा स्वादिष्ट है या इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं?

राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल के एएसआई सीमेंट आर्टिस्ट आर्ट के दिग्गज कलाकार हैं कि मल अलीग्रेन थिएटर की रोटीयां खाना कोई नया ट्रेंड नहीं है। हमारे भोजन का हिसासा काफी समय बाद बना है, इससे पहले यहां जौ, बजारा, मर्कका, चना आदि की ही रोटियां खाई जाती थीं। उसके बाद खाने के टुकड़ों में चना और जॉज़ एलोकेशन मिस प्लास्टिक ब्रेड का चलन भी पुराना हो रहा है।

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दो से बचे अनाज के टुकड़े को बनाया जाता है आटा मल पैलेटीग्रेन ही है, फिर भी शामिल है कोई भी अनाज मिला लिया जाए लेकिन समझ वाली चीज ये है कि हर अनाज का अपना गुण है, अलग-अलग एंजाइम हैं. हर अनाज के फायदे आपके और खाने का समय भी तय है। यदि इसके बारे में जाने बिना माल्टीग्रेन अनाज को रोजमर्रा के मिश्रण में शामिल कर लिया जाए तो फायदे के बजाय नुकसान भी हो सकता है।

रोजाना नहीं खा सकते हैं माल्टीग्रेन आटा?
डा. आरती का कहना है कि माल्टीग्रेन अपार्टमेंट की रोटियां का रोजाना खाना सही नहीं है। ऐसे कई सीड्स या ग्रेन मोर्टार हैं, जिनहें कई बैक्टीरिया में पाए जाते हैं। सभी अनाजों में प्रचुर मात्रा में होता है। इसके अलावा रागी में कैल्शियम, ज्वार में फास्फोरस, फास्फोरस में कार्बोहाइड्रेट, चना में प्रोटीन और गेन, बाजरा में लौह तत्व पाया जाता है। अगर इन सभी को समग्र रूप से एक साथ लिया जाए तो ये मेरे पोर्टफोलियो डॉक्स में डायरेक्ट पहुंच सकते हैं। इसकी वजह से पेट संबंधी कई सारे विकल्प संभव हैं। वहीं सभी का पर्या गुप्त गुण भी नहीं मिलता है। इसियोली मात्रा भी तय होनी चाहिए कि प्रतिदिन कौन सा सा अनाज खाना है।

मधुमेह और मधुमेह में सावधानियां
ऐसे ही कुछ अनाज हैं जो थाइर के अनाजों को नहीं दिए जा सकते। बाजरा, कोदो, रागी आदि जैसे छोटे-छोटे मीट को थायर ओरिएंटल के आटे के खाने के लिए मना लिया जाता है। जबकि कीड़ों के लिए माल्टीग्रेन खाना स्वादिष्ट होता है, लेकिन इसमें आटे का आटा शामिल नहीं किया जाता है। इसमें बाजरा और कुट्टू का आटा खाना बहुत ही स्वादिष्ट होता है। हालाँकि बीमारी के अनुसार किसी भी न्यूट्रिशनी मदरसा से विशेष रूप से सलाह लेना आवश्यक है।

ये करना बेहतर है
आरती में कहा गया है कि यदि माल्टीफिलीग्रेन को लेकर फ़्यूज़न किया जा सकता है और आप सभी अनाजों को शामिल करना भी चाहते हैं तो एक रसायन विज्ञान का सिद्धांत है कि सभी अनाज अलग-अलग हैं। जैसे सप्ताह में दो दिन की रोटी, एक दिन मक्का, बाज़ार, ज्वार या चने-जौ की रोटी खा सकते हैं। इससे सभी अनाजों के गुण मिलेंगे और वे एक दूसरे के साथ मिलकर एल्बम को भी बुरा नहीं पाएंगे।

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