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भारतीय रेलवे: गिनती में अब नहीं होगी हॉस्टल आग, धुआं गिनना ही नहीं मिलेगा फायदा, पहले से ज्यादा होगी सुरक्षा


रामकुमार नायक, रायपुरः रेलयात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे विभाग लगातार बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रहा है। वहीं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने अपने सभी एसी कोच में फायर स्मोक डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम शुरू कर दिया है। अब तक 415 एसी कोच और 50 पावर कारों का किराया भी चुकाया जा चुका है।


रेलवे के सभी एसी कोच में फायर और स्मोक डिटेक्शन सिस्टम के तहत लगभग 8-11 स्मोक सेंसर लगाए गए हैं, जो कोच के शौचालयों के गैंगवे एरिया और कोच के अंदर अंतिम स्थान पर लगे हुए हैं। स्मोक डिटेक्शन एक कनवर्टर में कंट्रोलर मॉड्यूल से होता है। आग लगने की स्थिति में यह कंट्रोलर मॉड्यूल विजुअल साउंड साउंड, लाइट इंडिकेटर, प्रीलोडेड घोषणा के लिए पी सिस्टम और ब्रेक का ऑटोमेटिक एक्टिविटी हो जाएगा और ट्रेन को रोकने और यात्रियों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सेंसर्स से चलने वाली ट्रेनें
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में रियो के पावर कार और पेंट्रीकार में भी एडवांस्ड फायर और स्मोक डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम के तहत एस्पीरेशन और हीट टाइप फायर और स्मोक डिटेक्शन सेंसर, सप्रेशन प्रोडक्शन, पीएलसी असिस्टेंट आदि उपकरण लॉन्च किए गए हैं। जो ट्रेनों के पावर कार एवं पेंट्रीकार में फायर स्मोक डिटेक्शन सिस्टम से अलग से बजने लगे हैं। जिससे, आग पर समय रहते फिजियोलॉजी कर लिया जाएगा। धुआँ, सिगरेट या आग का संकेत ही सिस्टम में लगे सेंसर हो एक्टिवेशन, एबसेल बजने के साथ दोनों प्रोग्रामशील उपकरण मॉड्यूल बनाने का यंत्र। कुछ देर में पानी का मिश्रण पाइपों में प्रवाहित होने लगा। फिर मिश्रित पानी के बहार से आग पर एतिहासिक पा लिया जाएगा।

इतनी ट्रैनन फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम से लैस
रेलवे विभाग का कहना है कि एसी कोचों में ध्रूमपान करने वालों को छूट दी जा सकती है. ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. ऐसे ढोलपान करने वालों से होने वाली सहयात्रियों को दिक्कत होती है, और सूची में बिक्री की घटना की संभावना बनी रहती है, अब टोकरी में ढोलपान करने वालों से और धुआंधार यात्राएं ही अर्लम अर्लट कर जाएंगी। वर्तमान में यह फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, शिवनाथ एक्सप्रेस, बिलासपुर-पटना एक्सप्रेस, बिलासपुर-पुणे एक्सप्रेस के साथ जनशताब्दी सहित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 28 जिलों के एसी कोचों में यह भुगतान किया जा चुका है. बिलासपुर मंडल की 14 जोड़ी, रायपुर मंडल की 13 एवं जोड़ी नागपुर मंडल की एक जोड़ी के सभी एसी कोच, पावरकार एवं पेंट्रीकार में यह सिस्टम लगाया गया है।

टैग: एसी ट्रेनें, आग, भारतीय रेल, स्थानीय18



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